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सीबीआई अफसर बनकर करते थे ठगी, ईरानी नागरिकों सहित छह गिरफ्तार

आरोपी एजेंट 100 से अधिक फर्जी आधार कार्ड बना चुके हैं और पुलिस ने इनके पास से एक कार, चार फर्जी नंबर प्लेट, आधार कार्ड बनाने वाले उपकरण और...

ईरानी नागरिक पुलिस और सीबीआई अफसर बनकर राजधानी दिल्ली आने वाले विदेशी सैलानियों के साथ ठगी और लूटपाट कर रहे थे। ग्रेटर कैलाश थाना पुलिस ने आरोपियों के इस गिरोह का पर्दाफाश कर चार ईरानी नागरिक, आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी यूआईडीबी के अधिकृत एजेंट सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी एजेंट 100 से अधिक फर्जी आधार कार्ड बना चुके हैं। और पुलिस ने इनके पास से एक गाडी, चार फर्जी नंबर प्लेट, 1,20,000 रियाल, 120 यूरो, और आधार कार्ड बनाने वाले उपकरण, एक लैपटॉप और इसके साथ ही तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। दक्षिण जिला डीसीपी चंदन चौधरी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

ईरानी नागरिक 55 वर्ष के मोहम्मद यूनुस उर्फ रिजवान, मो. गुलाम बेहरामी (29), 43 वर्ष के फरसद मुरादी, मो. कासिम (45), 40 वर्ष के भोगल निवासी मधुसूदन साहा और शकूर बस्ती में रहने वाले रवि यादव (23) के रूप में हुई है। बीसीए डिग्री होल्डर आरोपी रवि यादव अधिकृत एजेंट था। और उन्होंने बताया कि बर्लिन, जर्मनी निवासी 38 वर्षीय पीड़िता अपने पति का उपचार कराने ग्रेटर कैलाश-1 (जीके-1) आई थी। पीड़िता ने जीके- थानाध्यक्ष अजीत कुमार को 12 सितंबर को इस मामले में शिकायत दी थी।

उन्होंने अपनी शिकायत में बताया था कि वह करीब छह बजे हॉस्पिटल से घर लौट रही थी। तभी चार लोग गाडी में आए। आरोपियों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अफसर बताकर पासपोर्ट दिखाने के लिए कहा। जैसे ही पीड़िता ने आधार दिखाने के लिए अपना पर्स खोला, आरोपी पर्स में रखे कुल 3000 यूरो आदि लूटकर मौके से फरार हो गए। मामला दर्जकर थानाध्यक्ष अजीत कुमार की देखरेख में इंस्पेक्टर अनिल कुमार और साथ ही एसआई वरुण गुलिया की टीम ने जांच शुरू की।

पुलिस ने टीम ने लगभग 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। सीसीटीवी फुटेज से पता लगा कि ईरानी गिरोह ने इस वारदात को अंजाम दिया है। थानाध्यक्ष अजीत कुमार की देखरेख में टीम ने ग्रेटर नोएडा से मो. यूनुस और मो. गुलाम को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ करने के बाद इनका फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले चार आरोपी जिनका नाम फरसद मुरादी, मधुसूदन साहा, रवि यादव व मो. कासिम को गिरफ्तार कर लिया। रवि यादव के कब्जे से आधार कार्ड बनाने वाले उपकरण और एक लैपटॉप बरामद किया गया।

राजधानी दिल्ली आकर लोगों को ठगने लगा

मो. गुलाम ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह ससुर के साथ वर्ष फरवरी, वर्ष 2020 में दिल्ली आया। इसने दिल्ली के लाजपत नगर में रहकर दिल्ली और देश में अलग जगहों पर विदेशी सैलानियों को इस तरीके से ठगना शुरू कर दिया। वह जुलाई, वर्ष 2020 में दो अन्य ईरानी नागरिकों से मिला। और फिर इन लोगों ने मिलकर विदेशियों को ठगना शुरू कर दिया।

मो. कासिम ने जुलाई, वर्ष 2022 में इसका कुल आठ हजार में फर्जी आधार कार्ड बनाया। जब इसे पता लगा कि बनाया हुआ आधार कार्ड फर्जी है तो ये फरसद से मिला। फिर फरसद ने इसे मधुसूदन उर्फ राजू और रवि यादव से मिलवाया। इन्होंने कुल 19 हजार में मो. यूनुस और मो. गुलाम का आधार कार्ड बनाया। ये गाडी ऑनलाइन किराए पर लेते थे। फिर कार की नंबर प्लेट बदलकर वारदात करते थे।

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