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दो बेटियों के साथ आखिर क्यों फंदे से लटक गया पिता? रुला देगी पूरी दास्ता

शाहपुर इलाके में गीता वाटिका स्थित घोसीपुरवा में पिता और दो बेटियों ने दुपट्टे के सहारे से फंदा बनाकर खुदकुशी कर ली

गोरखपुर जिले से एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। यहां शाहपुर इलाके में गीता वाटिका स्थित घोसीपुरवा में पिता और दो बेटियों ने दुपट्टे के सहारे से फंदा बनाकर खुदकुशी कर ली। इस घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही एसपी सिटी और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल करने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए।

जानकारी के अनुसार शाहपुर इलाके के गीता वाटिका स्थित घोसीपुरवा निवासी ओमप्रकाश श्रीवास्तव के दो बेटे भी हैं। और दोनों अलग अलग के मकान में वही रहते हैं। बता दें ओमप्रकाश मूल रूप से बिहार के गुठनी थाना क्षेत्र के सिवान में रहने वाले हैं। और घोसीपुरवा में तीस साल से मकान बनवा कर वही रहते हैं।

ओम प्रकाश के बड़े बेटे जितेंद्र श्रीवास्तव (45) अपनी दो बेटियों और पिता के साथ ही रहते थे। इसके अलावा जितेंद्र श्रीवास्तव घर में ही सिलाई का काम करते थे। कुछ सालो पहले गांव से आते समय मैरवा स्टेशन पर 1999 में ट्रेन से गोरखपुर आते समय उनका एक पैर कट गया था। और वो कृत्रिम पैर के सहारे ही घर में ही सिलाई का काम करते थे और उनकी पत्नी सिम्मी की दो साल पहले ही कैंसर से मौत हो गई थी।

आप को बता दें उनकी दोनों बेटियां मान्या श्रीवास्तव (16) और मानवी श्रीवास्तव (14) आवास विकास स्थित वही सेन्ट्रल एकेडमी में एक कक्षा नौ और दूसरी सात में पढ़ती थीं। और मृतक के पिता ओमप्रकाश एक प्राइवेट गार्ड का काम करते हैं। सोमवार की रात शहर में वो ड्यूटी पर गए थे। और जब वो सुबह मकान में पहुंचे तो एक कमरे में बेटा और दूसरे कमरे में दोनो बेटियों के शव दुपट्टे के सहारे लटकता मिला।

ये सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल करने के बाद उनके शवोंं को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उसी घर से मिले दो मोबाइल फोन और सुसाइड नोट की पुलिस अभी जांच कर रही है। पुलिस इस मामले को जल्दी ही सुलझा लेगी। कुछ साल पहले गुठनी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरते समय जितेंद्र काफी घायल हो गए थे।

और इस हादसे में उनका दायां पैर कट गया था। बेटा और पौत्रियों की मृत्यु के बाद अब ओमप्रकाश का रो-रोकर बहुत बुरा हाल है। वही जितेंद्र ने पांच साल पहले दो तोते भी पाले थे जो उन्हें वो डैडी कहकर पुकारते थे। ओमप्रकाश जब बरामदे में पहुंचे तो खाली पिंजरा टंगा देखा तो वो उसको पकड़कर बहुत रो-रहे थे।

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