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शालीमार बाग हिंसा मामले में आरोपियों को जमानत, नहीं मिला घटना का फुटेज

अदालत ने सभी आरोपियों को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक अन्य जमानत राशि पर रिहा करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने उनके खिलाफ कई धारा...

अदालत ने हाल ही में शालीमार बाग में मादक द्रव्य पदार्थ के मामले को लेकर हुई हिंसा में 27 आरोपियों को जमनत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि सभी आरोपियों में से 14 को मात्र केवल इकबालियां बयानों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है और बिना किसी रिमांड के न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसके अलावा मामले में कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है।

रोहिणी अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों से पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है। वहीं चोटों के संबंध में जो रिपोर्ट दी गई है उसके अनुसार वे प्रकृति में साधारण चोटें हैं।

ऐसे में न्यायिक हित में आरोपी लक्ष्मी रायकबार, पिंटू कुमार, जोगेन्द्र साहू, इकबाल यादव, कृपाल, मकबुल अली, नंद किशोर, सुनील, प्रभुनाथ, राजेंद्र, आकाश, राजू, मिजाज अली, जीत कुमार, इम्तियाज अली खान, बजरंगी, संतोष, दिलीप, नागेंद्र प्रसाद, जाकिर अली, उमेश गोसाईं, भानु प्रताप, राकेश, नीतीश कुमार, जान मोहम्मद, आकाश व राकेश शर्मा की जमानत मंजूर करते है।

अदालत ने सभी आरोपियों को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक अन्य जमानत राशि पर रिहा करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 186/353/332/147/148/149/307/308 व सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने के आरोप में गिरफतार किया था।

बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किलों को फर्जी मामले में फंसाया गया है। इसके अतिरिक्त वर्तमान मामले में पुलिस अधिकारी द्वारा अभियुक्तों के विरुद्ध कोई भी आपत्तिजनक साक्ष्य एकत्र नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कुछ बाहरी लोग मुख्य रूप से ड्रग डीलर नियमित रूप से उनके क्षेत्र (झुग्गी) में प्रवेश करते थे और बच्चों और युवाओं को ड्रग्स बेच रहे थे। वे अन्य क्षेत्रों में अपना सामान बेचने के लिए छोटे बच्चों को काम पर रखने की भी कोशिश कर रहे थे।

उन्होंने कहा 27 जुलाई को ड्रग डीलरों ने उनके इलाके में प्रवेश किया और अपने इलाके में एक महिला के साथ छेड़खानी और दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया, जिसका झुग्गी के कुछ लोगों ने विरोध किया और दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। इसी दौरान ड्रग डीलर ने मारपीट शुरू कर दी और झुग्गी वालों पर पथराव और बोतलें फेंकनी शुरू कर दी और डंडा, लाठियों से उसको पीटना शुरू कर दिया।

लड़ाई मुख्य सड़क तक फैल गई और ट्रैफिक जाम हो गया। पीसीआर कॉल भी गरीब झुग्गी लोगों ने की थी और पुलिस के पहुंचने पर नशा तस्कर भाग गए और पुलिस ने निर्दोष झुग्गी के लोगों को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोग घटना के समय भी मौजूद नहीं थे और बाद में पुलिस ने उन्हें उनके आवास से लगभग प्रात: दो से तीन बजे बाद के घर से गिरफ्तार किया।

सरकारी वकील ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि वर्तमान मामले में लगभग 200-300 लोग सड़क के बीच में बैठे थे और ए ब्लॉक झुग्गी क्लस्टर में शराब की बिक्री को लेकर आंदोलन कर रहे थे।

पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे, उन्होंने भी आंदोलनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया बल्कि उन्होंने पुलिस पर और साथ ही अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं बोतलें फेंकना और पथराव करना शुरू कर दिया था। हमले के कारण आठ पुलिस अधिकारी घायल हो गए और हमारे पुलिस वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

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