CJP Protest: FIR खत्म होते ही बदला फैसला, 5 सितंबर का मार्च वापस
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज सभी...

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज सभी FIR खत्म करने का निर्देश दिया है। यह आदेश देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर भी लागू होगा।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके खिलाफ चल रहे मामलों पर इस आदेश का असर नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का ऐलान किया है।
20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज हुई थीं FIR
मामला जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों से जुड़ा है। बताया गया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुई घटनाओं के बाद कई जगहों पर FIR दर्ज की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों में राहत दी।
अनुच्छेद 142 के तहत मिला आदेश
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया। साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह फैसला मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। इसे भविष्य के दूसरे मामलों में अपने आप लागू होने वाला उदाहरण नहीं माना जाएगा।
अदालत ने यह राहत दोनों पक्षों के बीच हुई सहमति और कोर्ट के सामने रखी गई शर्तों के पालन से भी जोड़ी है।
सौरव दास ने मार्च वापस लेने का ऐलान किया
सुनवाई के दौरान CJP की ओर से प्रवक्ता सौरव दास अदालत में मौजूद रहे। उन्होंने संगठन की तरफ से कहा कि सरकार के भरोसे और अदालत के आदेश को देखते हुए 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस लिया जा रहा है। इसके बाद CJI सूर्यकांत ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे सकारात्मक पहल बताया।
दिल्ली पुलिस की अर्जी पर आया फैसला
यह आदेश दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल अंतरिम आवेदन पर सुनाया गया। पुलिस ने अदालत को बताया था कि वह CJP के प्रदर्शन से संबंधित 13 FIR में आगे की कार्रवाई नहीं करना चाहती। इसके बाद अदालत के सामने पूरे मामले को लेकर दोनों पक्षों की स्थिति रखी गई और सुप्रीम कोर्ट ने FIR खत्म करने का आदेश दिया।
CJP ने फैसले को छात्रों की जीत बताया
फैसले के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने इसे छात्रों के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों को लेकर संगठन लगातार अपनी बात रख रहा था और अब अदालत के आदेश से उन्हें राहत मिली है। CJP की ओर से इसे आंदोलन से जुड़े छात्रों की जीत बताया गया।
36 दिनों तक चला था आंदोलन
CJP ने NEET पेपर लीक और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में 20 जून को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया था। बाद में आंदोलन को अलग-अलग छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिलने लगा। 28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी प्रदर्शन में शामिल हुए और अनशन शुरू किया।
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने ‘चलो संसद’ मार्च निकालने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए बल प्रयोग और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस घटना में 150 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया गया था। इसके बाद कई राज्यों में भी प्रदर्शन हुए और अलग-अलग स्थानों पर मामले दर्ज किए गए। सरकार और CJP के बीच बातचीत के कई दौर भी चले। अंततः करीब 36 दिन बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।
CJP के भविष्य पर भी चल रही तैयारी
आंदोलन खत्म होने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके संगठन के अगले कदम, कोर कमेटी और भविष्य के आंदोलनों को लेकर रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। उनकी ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि फिलहाल CJP को राजनीतिक पार्टी में बदलने की योजना नहीं है।









