Delhi Crime: ससुर पर बहू से गलत व्यवहार का आरोप, कोर्ट से जमानत
दिल्ली हाईकोर्ट ने बहू के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे करीब 80 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को अग्रिम जमानत दे दी है.....

Delhi Crime: दिल्ली हाईकोर्ट ने बहू के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे करीब 80 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि मामले में स्त्रीधन की कथित वसूली के लिए आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी नहीं है। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तारी की स्थिति में 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।
2026 में दर्ज हुई थी FIR
महिला की शिकायत पर शुरुआत में 29 अप्रैल 2026 को IPC की धारा 498A और 406 के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में इसमें IPC की धारा 354, 354A और 376 के साथ BNS की धारा 74 भी जोड़ी गई। शिकायत में महिला ने अपने ससुर पर कई मौकों पर अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। FIR में एक घटना का जिक्र करते हुए महिला ने आरोप लगाया कि ससुर की मालिश करने के दौरान उन्होंने उसके हाथ को आपत्तिजनक तरीके से अपनी ओर खींचा था। महिला ने वर्ष 2022 की एक अन्य घटना को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
आरोपी ने लगाए वैवाहिक विवाद का आरोप
आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि शिकायत के पीछे परिवार में चल रहा वैवाहिक विवाद है। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी पर लगाए गए आरोप उसके बेटे और बहू के बीच चल रहे विवाद में दबाव बनाने के उद्देश्य से लगाए गए हैं। वहीं, अभियोजन पक्ष ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच के इस चरण में आरोपी से हिरासत में पूछताछ उपयोगी हो सकती है।
पुलिस के नोटिस पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से कहा गया कि आरोपी को जांच में शामिल होने के लिए कई बार नोटिस दिए गए थे। अदालत ने जब उन नोटिसों को पेश करने को कहा तो पुलिस अधिकारी ने बताया कि नोटिस लिखित रूप में नहीं, बल्कि मौखिक तौर पर दिए गए थे। इस पर अदालत ने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और कहा कि कथित नोटिस से संबंधित केस डायरी भी रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई।
कनाडा जाने की आशंका भी नहीं मानी आधार
अभियोजन की ओर से यह आशंका भी जताई गई कि आरोपी के परिवार के कुछ सदस्य कनाडा में रहते हैं, इसलिए वह देश से बाहर जा सकता है। हाईकोर्ट ने इस आधार को अकेले पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने आरोपी की उम्र को भी ध्यान में रखा और कहा कि केवल परिवार के सदस्यों के विदेश में रहने के आधार पर उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित नहीं किया जा सकता।
लंबी देरी पर भी कोर्ट की नजर
अग्रिम जमानत पर सीमित विचार के दौरान अदालत ने कथित घटनाओं और FIR दर्ज होने के बीच के लंबे अंतराल पर भी गौर किया। कोर्ट ने कहा कि शिकायत में कथित घटनाओं की सटीक तारीखें स्पष्ट नहीं हैं और इतनी लंबी देरी को लेकर रिकॉर्ड पर पर्याप्त परिस्थितियां सामने नहीं आई हैं। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत के स्तर पर की गई टिप्पणियों को मामले के अंतिम गुण-दोष पर फैसला नहीं माना जाएगा। मुकदमे के दौरान पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट करेगा।









