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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनीता केजरीवाल को नोटिस जारी किया है….

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी, सुनीता केजरीवाल, एक नए कानूनी विवाद में फंस गई हैं। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनीता को नोटिस जारी किया है, जिसमें उन पर अदालत की कार्यवाही का वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर साझा करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी, सुनीता केजरीवाल, एक नए कानूनी विवाद में फंस गई हैं। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनीता को नोटिस जारी किया है, जिसमें उन पर अदालत की कार्यवाही का वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर साझा करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।

मामला क्या है?

शिकायतकर्ता, एक वरिष्ठ वकील, का आरोप है कि सुनीता केजरीवाल ने 28 मार्च को राउज़ एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई का वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। इस सुनवाई में विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से संबंधित मामले की सुनवाई की थी। कोर्ट कार्यवाही का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिससे अदालत की गरिमा पर सवाल उठे हैं।

कानूनी नियमों का उल्लंघन

शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस कार्रवाई ने दिल्ली उच्च न्यायालय के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन किया है, जो 26 अक्टूबर 2021 को जारी किए गए थे। इन नियमों के तहत अदालत की कार्यवाही का वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रसार सख्त मना है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुनीता केजरीवाल और अन्य नेताओं ने जानबूझकर इस वीडियो को साझा किया, जिससे न्याय प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की गई।

कोर्ट का नोटिस और सोशल मीडिया प्लेटफार्म

इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनीता केजरीवाल को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को भी यह वीडियो हटाने के लिए कहा गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह एक पूर्व नियोजित साजिश थी, जिससे अदालत की कार्यवाही को बदनाम करने का प्रयास किया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

यह घटना उस समय सामने आई है जब अरविंद केजरीवाल पहले से ही दिल्ली आबकारी नीति घोटाले के मामले में कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उनके ऊपर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं और वे तिहाड़ जेल में बंद हैं। इस नए मामले ने राजनीतिक माहौल को और भी गर्मा दिया है और विपक्षी दलों ने इसे लेकर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में आगे क्या निर्णय लेती है और इसका राजनीतिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। क्या यह घटना आम आदमी पार्टी के लिए नई चुनौतियां खड़ी करेगी या फिर इससे पार्टी की छवि को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

सुनीता केजरीवाल पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इस मामले में अदालत का निर्णय महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, जो आने वाले चुनावों में एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है।

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