DTC Strike Update: तीसरे दिन भी सड़कों से बसें गायब, लाखों यात्री परेशान
दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल का असर तीसरे दिन भी यात्रियों की परेशानी के रूप में दिखाई दिया। गुरुवार को कई बस स्टॉप पर लोग लंबे...

दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल का असर तीसरे दिन भी यात्रियों की परेशानी के रूप में दिखाई दिया। गुरुवार को कई बस स्टॉप पर लोग लंबे समय तक बस का इंतजार करते रहे, लेकिन सेवा सामान्य नहीं हो सकी। इसके चलते बड़ी संख्या में यात्रियों ने मेट्रो का रुख किया, जबकि कई लोगों को ऑटो, ई-रिक्शा और कैब से सफर करना पड़ा। वैकल्पिक साधनों पर निर्भरता बढ़ने से कई यात्रियों का यात्रा खर्च भी बढ़ गया।
सुबह के वक्त सबसे ज्यादा परेशानी दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और स्कूल जाने वाले बच्चों को हुई। मेट्रो स्टेशनों पर सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा भीड़ देखने को मिली। कई यात्रियों को अतिरिक्त समय लगने के कारण अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई। दिल्ली में जारी हड़ताल के बीच प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से समाधान के लिए बैठकों का दौर भी जारी रहा।
बस स्टॉप पर इंतजार, नहीं मिली सवारी
गुरुवार को राजधानी के कई प्रमुख बस स्टॉप पर यात्री बसों का इंतजार करते नजर आए। कुछ जगहों पर बसें दिखाई भी दीं, लेकिन यात्रियों के मुताबिक वे रुकने के बजाय आगे निकल गईं। नई दिल्ली इलाके के केंद्रीय टर्मिनल, रकाबगंज, एनडीओपी, गुरुद्वारा बंगला साहिब, वाईएमसीए, तालकटोरा, पालिका केंद्र, शिवाजी स्टेडियम, कृषि भवन, मंडी हाउस, आईटीओ और आरएमएल जैसे प्रमुख इलाकों में बस सेवा प्रभावित रही।
बस नहीं मिलने पर यात्रियों ने ऑटो, ई-रिक्शा, बाइक टैक्सी और ऐप आधारित कैब का सहारा लिया। कई यात्रियों ने ज्यादा किराया लगने की शिकायत भी की। गुरुवार को दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में यात्रियों के घंटों तक फंसे रहने और वैकल्पिक साधनों के लिए अधिक पैसे खर्च करने की स्थिति सामने आई।
सड़क से बसें कम हुईं तो मेट्रो पर बढ़ा दबाव
डीटीसी बसों की हड़ताल के कारण यात्रियों का एक बड़ा हिस्सा मेट्रो की तरफ चला गया। इससे मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली मेट्रो में 72.73 लाख यात्रियों ने सफर किया था। मंगलवार को यह संख्या बढ़कर 76.86 लाख और बुधवार को 80.71 लाख तक पहुंच गई।
अतिरिक्त यात्रियों को संभालने के लिए डीएमआरसी ने अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं की व्यवस्था की। गुरुवार को भी आठ अतिरिक्त ट्रेनों को जरूरत के अनुसार चलाने की व्यवस्था रखी गई और अतिरिक्त फेरे बढ़ाए गए।
अधिकांश बसें डिपो में खड़ी रहीं
हड़ताल के तीसरे दिन दिल्ली की बस सेवा बुरी तरह प्रभावित रही। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 10 हजार से ज्यादा चालक हड़ताल में शामिल रहे और डीटीसी की लगभग 6,840 बसों में से करीब 80 प्रतिशत बसें सड़कों से बाहर रहीं। इससे रोजाना बसों पर निर्भर रहने वाले लाखों यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई।
हड़ताल के दूसरे दिन कुछ बसें सड़कों पर चल रही थीं, लेकिन तीसरे दिन सेवा और ज्यादा सीमित दिखाई दी। कई डिपो में बसें खड़ी रहीं और यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ा।
पूर्वी दिल्ली में ऑटो-ई-रिक्शा और मेट्रो बने विकल्प
पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में यात्रियों ने हड़ताल की जानकारी पहले से होने के कारण बस अड्डों पर ज्यादा समय गंवाने के बजाय दूसरे साधनों का रुख किया। कम दूरी के लिए लोग ऑटो और ई-रिक्शा का इस्तेमाल करते नजर आए, जबकि लंबी दूरी के यात्रियों ने मेट्रो को प्राथमिकता दी।
नंदनगरी सहित कई डिपो में बस संचालन प्रभावित रहा। इसके चलते पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर ऑटो और ई-रिक्शा की आवाजाही बढ़ी, जबकि मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों का दबाव बना रहा।
वेतन और सुविधाओं को लेकर जारी है विवाद
हड़ताल कर रहे चालक और कर्मचारी वेतन बढ़ाने के साथ-साथ अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। यूनियन के मुताबिक, संविदा चालकों को फिलहाल करीब ₹862 प्रतिदिन भुगतान किया जाता है और उनकी मांग इसे बढ़ाकर ₹2,000 प्रतिदिन करने की है। इसके अलावा सरकारी छुट्टियों का भुगतान, वार्षिक बोनस, मेडिकल सुविधा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ देने की मांग भी शामिल है। यूनियन ने महंगाई भत्ते और वेतन वृद्धि से जुड़ी लंबित मांगों का भी मुद्दा उठाया है।
दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने हड़ताली चालकों से काम पर लौटने की अपील की है। सरकार की ओर से निजी ऑपरेटरों के साथ जुड़े चालकों की समस्याओं को सुलझाने की बात कही गई है। वहीं, यूनियन का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने तक विरोध जारी रह सकता है। फिलहाल हड़ताल के कारण दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है और यात्रियों को बसों की जगह मेट्रो, ऑटो, ई-रिक्शा और कैब जैसे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।









