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सिगरेट न पीने वालों को भी हो रहा फेफड़े का कैंसर! क्या है इसकी वजह? जानिए पूरी खबर

लोगों को फेफड़ों का कैंसर हो रहा है, जो धूम्रपान नहीं करते हैं, कैंसर का प्रमुख कारण धूम्रपान नहीं बल्कि प्रदूषण माना जा रहा है

दिल्ली – NCR में बहुत से लोगों को प्रदूषण के कारण फेफड़ों का कैंसर हो रहा है। जिसका अभी मुख्या कारण धूम्रपान से फेफड़ों में कैंसर बताया जा रहा था लेकिन अब ऐसे लोगों को भी फेफड़ों का कैंसर हो रहा है, जो धूम्रपान नहीं करते हैं क्योकि इन लोगों में भी कैंसर का प्रमुख कारण धूम्रपान नहीं बल्कि प्रदूषण माना जा रहा है।

बता दें कि मेदांता हॉस्पिटल के डॉ. अरविंद कुमार व उनकी टीम ने मार्च 2012 से नवंबर 2022 के बीच 304 मरीजों पर की स्टडी करी और पाया कि 154 मरीज धूम्रपान करते थे, जबकि 150 धूम्रपान नहीं करते थे। वही OPD में आने वाले मरीजों में धूम्रपान न करने वाले व कम उम्र वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। जिसके चलते मेदांता ने मंगलवार को #BeatLungCancer अभियान लॉन्च किया और ये अभियान लॉन्च किए जाने के दौरान कैंसर को मात देकर स्वस्थ हुए लोगों ने अपने अनुभवों को साझा किया औैर डांस कर इसे खुशी का इजहार किया।

50% मरीज नहीं करते थे धूम्रपान

रिपोर्टे में डॉ़ अरविंद ने बताया कि करीब 50 प्रतिशत मरीज धूम्रपान नहीं करते थे और 70 प्रतिशत मरीज 50 साल से कम उम्र के थे, और 30 साल से कम उम्र वाले लोग 100 प्रतिशत धूम्रपान नहीं करते थे। वही दूसरी तरफ महिलाओं में भी फेफड़ों के कैंसर वाले मामले बढ़े हैं। पहले महिलाओं की संख्या बेहद कम थी।

आने वाले वर्षों में बढ़ेंगे मामले

हालाँकि, पूरी जांच के बाद ये साबित हो रह अहइ कि अगर सब ऐसी चलता रह ऑटो आने वाले 10 वर्षों में धूम्रपान नहीं करने वाली महिलाओं, कम उम्र के लोगों में फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ने की आशंका है औअर ज्यादातर मामलों में डाइग्नोस देरी से होने की आशंका है क्योकि जब पर्याप्त इलाज संभव नहीं हो पाता है और फेफड़ों के कैंसर के कारण मृत्युदर बढ़ जाती है।

निवारण और इलाज जरूरी

  • इस जोखिम वाली आबादी (55 साल से ज्यादा उम्र और धूम्रपान के 25 सालों से अधिक समय के इतिहास वाले) में लो-डोज़ सीटी स्कैन द्वारा फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग कराने के प्रबंध कराने जरूरी।
  • तम्बाकू का सेवन कम करने और वायु प्रदूषण घटाने के प्रभावशाली उपायों से फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते मामलों को नियंत्रित में किया जा सकता है।
  • ऐसे ही कई अन्य बीमारियों की तरह ऐसे स्पेशलाइज्ड सेंटर कम हैं, जहां फेफड़ों के कैंसर का इलाज प्रदान किया जा सके। ऐसे सेंटर्स की संख्या को बढ़ाना होगा।

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Abhishikt Masih

अभिषिक्त मसीह तेज़ तर्रार न्यूज़ चैनल में बतौर कंटेंट राइटर कार्य कर रहे है। इन्होने अपने लेख से सच्ची घटनाओं को लिखकर लोगों को जागरूक किया है।

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