Harish rana death: सालों बाद खत्म हुआ संघर्ष, हरीश राणा ने ली अंतिम सांस
हरीश राणा को मार्च के मध्य में एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया था, जहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत उन्हें पेलिएटिव केयर में रखा गया।

Harish rana death: दिल्ली के एम्स में हरीश राणा का निधन हो गया, जो लंबे समय तक कोमा में रहने के बाद इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति पाने वाले देश के पहले व्यक्ति माने जा रहे हैं। करीब 13 साल से अचेत अवस्था में जीवन बिता रहे हरीश ने आखिरकार चिकित्सा निगरानी में अपनी अंतिम सांस ली। यह मामला भारत में जीवन और मृत्यु से जुड़े संवेदनशील कानूनी और नैतिक सवालों को फिर से चर्चा में ले आया है।
हरीश राणा को मार्च के मध्य में एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया था, जहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत उन्हें पेलिएटिव केयर में रखा गया। अदालत के आदेश के बाद उनकी जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता को चरणबद्ध तरीके से हटाया गया। पहले लिक्विड डाइट बंद की गई और फिर पानी देना भी रोक दिया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने यह सुनिश्चित किया कि उन्हें किसी तरह का असहज दर्द न हो, इसलिए दर्द निवारक दवाओं के जरिए देखभाल जारी रही।
इससे पहले, 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी। अदालत ने कहा था कि इस प्रक्रिया को गरिमा और संवेदनशीलता के साथ पूरा किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी माना कि लंबे समय से अचेत अवस्था में रह रहे व्यक्ति को अनावश्यक कष्ट में रखना उचित नहीं है।
हरीश राणा की जिंदगी एक दर्दनाक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई थी। वर्ष 2013 में चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान वह अपने हॉस्टल की ऊंचाई से गिर गए थे, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। इसके बाद से वह कभी होश में नहीं आ सके और लगातार बिस्तर पर ही रहे। लंबे समय तक एक ही अवस्था में रहने के कारण उनके शरीर पर कई तरह की चिकित्सीय जटिलताएं भी विकसित हो गई थीं।
परिवार के लिए यह फैसला बेहद कठिन था। हरीश के माता-पिता ने वर्षों तक उनके ठीक होने की उम्मीद बनाए रखी, लेकिन समय के साथ जब स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना था कि वे अपने बेटे को इस तरह की पीड़ा में और नहीं देख सकते।
अदालत के फैसले के बाद चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत धीरे-धीरे जीवनरक्षक उपाय हटाए गए और अंततः हरीश राणा का निधन हो गया। यह मामला न केवल कानून, बल्कि चिकित्सा और समाज के स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है, जो भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।
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