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लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला ने अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर को…

लोकसभा में एक अप्रत्याशित घटना के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल को फटकार लगाई। यह घटना उस समय हुई जब हरसिमरत कौर बादल स्पीकर को बधाई दे रही थीं। यह घटना तब सामने आई जब संसद के मानसून सत्र के दौरान हरसिमरत कौर बादल स्पीकर ओम बिरला को संबोधित कर रही थीं। अपनी बात रखते हुए, उन्होंने स्पीकर की प्रशंसा की और उन्हें बधाई दी। लेकिन उनके भाषण के दौरान कुछ टिप्पणियों पर स्पीकर ओम बिरला ने आपत्ति जताई और उन्हें बीच में ही रोक दिया।

नई दिल्ली: लोकसभा में एक अप्रत्याशित घटना के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल को फटकार लगाई। यह घटना उस समय हुई जब हरसिमरत कौर बादल स्पीकर को बधाई दे रही थीं।

यह घटना तब सामने आई जब संसद के मानसून सत्र के दौरान हरसिमरत कौर बादल स्पीकर ओम बिरला को संबोधित कर रही थीं। अपनी बात रखते हुए, उन्होंने स्पीकर की प्रशंसा की और उन्हें बधाई दी। लेकिन उनके भाषण के दौरान कुछ टिप्पणियों पर स्पीकर ओम बिरला ने आपत्ति जताई और उन्हें बीच में ही रोक दिया।

स्पीकर ओम बिरला ने बादल को अनुशासन का पालन करने की नसीहत दी और कहा कि संसद के नियमों का पालन करना सभी सांसदों का कर्तव्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसदीय मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनुचित टिप्पणी या व्यवधान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हरसिमरत कौर बादल, जो अकाली दल की प्रमुख नेता हैं, ने इस घटना के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ स्पीकर को बधाई देना था और किसी को आहत करने का उनका कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि वे संसद में अनुशासन और मर्यादा का सम्मान करती हैं और आगे भी ऐसा करती रहेंगी।

इस घटना ने संसद में मौजूद अन्य सांसदों और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है। कई सांसदों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं और स्पीकर ओम बिरला के सख्त रुख की सराहना की है। उनका कहना है कि संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए इस तरह की सख्ती आवश्यक है।

यह घटना संसदीय सत्र के दौरान अनुशासन और मर्यादा की आवश्यकता पर एक महत्वपूर्ण चर्चा की शुरुआत कर सकती है। स्पीकर ओम बिरला की इस कड़ी चेतावनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संसद में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस घटना के बाद, संसद के अन्य सदस्यों और राजनीतिक दलों ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किए हैं। वे इस बात पर सहमत हैं कि संसद की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना सभी सांसदों का प्राथमिक कर्तव्य है और इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

यह घटना संसद के इतिहास में एक और अध्याय जोड़ती है, जो भविष्य में संसदीय कार्यवाही में अनुशासन और मर्यादा के महत्व को रेखांकित करेगी।

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