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माधव शरण: कोमा से लेकर 12वीं में 93% तक का सफर

इंसान की इच्छाशक्ति और अदम्य संघर्ष की अनदेखी कभी भी किसी भी मुश्किल को आसान बना सकती है। यह सच है, और दिल्ली के युवा माधव शरण की कहानी इसी सत्यता को प्रमाणित करती है।

इंसान की इच्छाशक्ति और अदम्य संघर्ष की अनदेखी कभी भी किसी भी मुश्किल को आसान बना सकती है। यह सच है, और दिल्ली के युवा माधव शरण की कहानी इसी सत्यता को प्रमाणित करती है। दो साल पहले, जब उन्हें कोमा में जीना पड़ा, उन्होंने अपने सपनों को हासिल करने का इरादा बिना किसी हिचकिचाहट के निभाया।

माधव, एक 18 साल का युवा, अगस्त 2021 में ब्रेन हैमरेज का शिकार हुआ था। उनका दिमाग एक-तिहाई हिस्सा काम नहीं कर रहा था, और उन्हें लम्बे समय तक कोमा में रहना पड़ा। लेकिन उनकी इस हालत ने उनके हौसले को कभी नहीं टूटने दिया। उन्होंने 12वीं की परीक्षा में 93% अंक प्राप्त किए, जो उनके इस सफर की गरिमा को दर्शाते हैं।

माधव के पिता, दिलीप शरण, ने उनके संघर्ष को वाक्य-वाक्य में साझा किया, “अस्पताल में भर्ती होने के पहले, माधव कोमा में था। उस समय वो हमारे साथ बात नहीं कर पा रहे थे। हमें उसकी स्थिति का अनुभव नहीं हो रहा था।”

माधव की रिकवरी में कई बाधाएं आईं, लेकिन उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। उनके पिता कहते हैं, “माधव की रिकवरी धीमी थी। धीरे-धीरे उसने फिर से बोलना सीखा, लेकिन भाषा उसके लिए एक चुनौती थी।”

इसी इच्छाशक्ति और उत्साह के साथ, माधव ने अपने अध्ययन को जारी रखा है। उन्होंने साइंस से आर्ट्स में स्ट्रीम चेंज किया, और अपने करियर की दिशा में प्रगति की है। वे अब पॉलिटिकल साइंस में आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं, और अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

आज, जब CBSE ने 12वीं के परिणाम घोषित किए, दिल्ली में 94.97% छात्रों की पासें आई हैं। इस समर्थन की विश्वासघात करते हुए, हम माधव और उसके जैसे साहसिक युवाओं को बधाई देते हैं जो हमें अपने उत्कृष्टता और प्रेरणा का प्रतीक बनाते हैं। उन्हें उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं।

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