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आदर्श शिक्षक पुरस्कार से पुरस्कृत अरविंद देवकर ने की आत्महत्या, बच्चों के स्कूल छोड़ने से थे आहत

हाल ही में पुणे के एक गांव में जिला परिषद स्कूल में स्थानांतरित प्राथमिक शिक्षक अरविंद ज्ञानेश्वर देवकर ने बच्चों को स्कूल जाने के लिए राजी करने में असमर्थता के कारण हताश होकर आत्महत्या कर ली।

हाल ही में पुणे के एक गांव में जिला परिषद स्कूल में स्थानांतरित प्राथमिक शिक्षक अरविंद ज्ञानेश्वर देवकर ने बच्चों को स्कूल जाने के लिए राजी करने में असमर्थता के कारण हताश होकर आत्महत्या कर ली। 46 वर्षीय अरविंद देवकर एक महीने पहले ही उस स्कूल में स्थानांतरित होकर आये थे। वे मूलतः पुणे के पुरंदर तहसील के मावड़ी पिंपरी गांव के रहने वाले थे और परिवार के साथ उरुली कंचन में रहते थे। उनकी पत्नी भी शिक्षका है। उनके दो बच्चें हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, उनके आगमन पर उस विद्यालय में मात्र दस बच्चों का नामांकन था। जबकि वह अकेले शिक्षक थे। स्कूल काफी गंदा होने की वजह से पठन-पाठन में बाधा उत्पन्न हो रही थी। इसलिए बच्चों की मदद से खुद ही साफ-सफाई करने में जुट गए। लेकिन बाद में बच्चों के माता-पिता ने बच्चों से स्कूल साफ करवाने को लेकर आपत्ति जताई और नौ बच्चों को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया। बांकी एक छात्रा ने भी कुछ दिनों बाद स्कूल आना बंद कर दिया।

अरविंद देवकर ने इसे अपना पेशेवर विफलता माना और धैर्यहीन होकर 3 अगस्त को जावजीबुवाची वाडी स्थित स्कूल परिसर में ही कीटनाशक खा लिया। इससे तुरंत पहले उन्होंने एक रिश्तेदार को व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी स्थिति बताई थी।

व्हाट्सएप मैसेज में, देवकर ने बताया कि उन्होंने स्कूल में स्वच्छता अभियान शुरू किया था, जिसमें कई छोटे-मोटे काम किए गए, क्योंकि कोई अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध नहीं था। कॉन्स्टेबल रमेश गायकवाड़ के अनुसार, अगले दिन, माता-पिता अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए स्कूल में एकत्र हुए और अपने बच्चों से वहां काम कराए जाने के बारे में चिंताओं को उजागर किया।

अरविंद देवकर के संदेश में स्कूल से कोई सहायता नहीं मिलने पर उनकी निराशा भी व्यक्त की गई, जिसके कारण उन्हें विभिन्न कार्य स्वयं करने पड़े। माता-पिता के साथ जुड़ने और उन्हें मनाने के अपने प्रयासों के बावजूद, वह एक भी छात्र को स्कूल में बनाए रखने में असफल रहे थे। इस कारण उन्होंने ने अपना धैर्य खो दिया।

कीटनाशक खाने के बाद जानकारी होने पर ग्रामीणों द्वारा उन्होंने उरुली कंचन के एक अस्पताल में लाया गया। वहां हालत बिगड़ने पर हडपसर के सह्याद्रि अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहाँ 8 अगस्त को उनकी मृत्यु हो गई।

कम स्कूल नामांकन का मुद्दा हाल के वर्षों में काफी बढ़ गया है। खासकर पुणे जिले के सुदूर आदिवासी कस्बों और बस्तियों में यह समस्या लगातार बनी हुई हैं। अरविंद देवकर उन्नीस साल से उप शिक्षक थे। वे आदर्श शिक्षक पुरस्कार से पुरस्कृत थे। उनकी आत्महत्या के कदम से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया हैं। अधिकारीयों को गहन जाँच के आदेश दिए गए हैं।

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