TET Rule: टीईटी पास करो या नौकरी छोड़ो, शिक्षकों में बढ़ा आक्रोश
हाथरस जिले के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 1500 से अधिक ऐसे शिक्षक-शिक्षिकाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिन्होंने अभी तक शिक्षक....

TET Rule: हाथरस जिले के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 1500 से अधिक ऐसे शिक्षक-शिक्षिकाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिन्होंने अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब पात्रता के दायरे में आने वाले इन सेवारत शिक्षकों को तय समय सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। परीक्षा पास नहीं करने की स्थिति में उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
परिषदीय स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति के लिए टीईटी पहले से ही अनिवार्य योग्यता का हिस्सा रही है। अब यह शर्त उन कुछ शिक्षकों पर भी लागू होगी, जो नियम लागू होने से पहले नियुक्त होकर लंबे समय से स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं।
दो साल में पास करनी होगी टीईटी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार पात्र शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के लिए दो वर्ष का समय दिया गया है। इस दायरे में वे शिक्षक आते हैं, जिनकी नियुक्ति आरटीई अधिनियम के 1 अप्रैल 2010 को लागू होने से पहले हुई थी और जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय बाकी है। इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग की ओर से जिले में ऐसे शिक्षकों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्हें टीईटी की अनिवार्यता पूरी करनी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार हाथरस में इनकी संख्या 1500 से अधिक बताई जा रही है।
नए नियम से शिक्षकों में नाराजगी
टीईटी की अनिवार्यता को लेकर कई शिक्षक संगठनों में असंतोष बढ़ रहा है। संगठनों का कहना है कि जो शिक्षक वर्षों से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं, उन पर अब दोबारा पात्रता परीक्षा की शर्त लागू करना उचित नहीं है। शिक्षक संगठन सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से बाहर रखने की मांग को लेकर आंदोलन भी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि शिक्षकों ने लंबे समय से स्कूलों में पढ़ाने का काम किया है और अब उन्हें नौकरी बचाने के लिए परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है।
बच्चों को पढ़ाएं या टीईटी की तैयारी करें
शिक्षकों का कहना है कि स्कूल में पढ़ाने के अलावा उन्हें कई दूसरे विभागीय कार्य भी करने पड़ते हैं। शिक्षक आलोक कुमार के मुताबिक शिक्षकों पर चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अलग-अलग सरकारी ऐप पर रोजाना कई तरह के काम पूरे करने का दबाव रहता है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में शिक्षकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे स्कूल में बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें या फिर टीईटी की तैयारी के लिए समय निकालें। उनके अनुसार नई अनिवार्यता ने पहले से काम के दबाव का सामना कर रहे शिक्षकों की परेशानी और बढ़ा दी है।
2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए पहले से लागू है नियम
शिक्षा का अधिकार यानी आरटीई अधिनियम में शिक्षकों की योग्यता से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत टीईटी को शिक्षक नियुक्ति की आवश्यक योग्यता में शामिल किया गया था।
1 अप्रैल 2010 के बाद जिन शिक्षकों की नियुक्तियां हुई हैं, वे निर्धारित योग्यता के तहत टीईटी उत्तीर्ण कर चुके हैं। विवाद मुख्य रूप से उन शिक्षकों को लेकर है, जिनकी नियुक्ति आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले हुई थी। ऐसे शिक्षकों को अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार निर्धारित अवधि में टीईटी पास करनी होगी। तय समय में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने वाले पात्र शिक्षकों की सेवा पर इसका असर पड़ सकता है।
शिक्षकों के सामने नौकरी बचाने की चुनौती
नए नियम के चलते पुराने नियुक्ति वाले शिक्षकों के सामने अब टीईटी पास करने की चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई और विभागीय जिम्मेदारियां निभानी हैं, वहीं दूसरी ओर नौकरी जारी रखने के लिए परीक्षा की तैयारी भी करनी होगी।
इसी मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठन टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग उठा रहे हैं। आने वाले समय में इस मामले को लेकर शिक्षकों और विभाग के बीच विवाद और आंदोलन बढ़ने की संभावना भी बनी हुई है।









