Mirzapur Movie: मुन्ना भैया का स्वैग लौटा, लेकिन क्या फिल्म दिल जीत पाई?
फिल्म की कहानी ‘मिर्जापुर’ की उसी दुनिया को आगे बढ़ाती है, जिसे दर्शक सीरीज में देख चुके हैं। इस बार कहानी के केंद्र में बब्बन बबुआ हैं...

Mirzapur The Movie Review: ‘मिर्जापुर’ की कहानी ने वेब सीरीज के तीन सीजन के दौरान दर्शकों के बीच जबरदस्त पकड़ बनाई। कालीन भैया, मुन्ना और गुड्डू पंडित की गद्दी की लड़ाई ने खूब सुर्खियां बटोरीं। अब इसी दुनिया को बड़े पर्दे पर लाया गया है। अली फजल, पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु जैसे पुराने चेहरों के साथ ‘मिर्जापुर: द मूवी’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस कहानी का भौकाल छोटी स्क्रीन पर इतना जबरदस्त रहा, क्या वह बड़े पर्दे पर भी वही असर पैदा कर पाती है? करीब तीन घंटे की इस फिल्म में क्या खास है और कहां कहानी कमजोर पड़ती है, आइए जानते हैं।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी ‘मिर्जापुर’ की उसी दुनिया को आगे बढ़ाती है, जिसे दर्शक सीरीज में देख चुके हैं। इस बार कहानी के केंद्र में बब्बन बबुआ हैं, जिसका किरदार रवि किशन ने निभाया है। बब्बन की नजर मिर्जापुर की सत्ता पर है और इसके लिए उसका निशाना कालीन भैया और मुन्ना बने हुए हैं। कालीन भैया तक पहुंचने की उसकी कोशिश में उसे कई लोगों का साथ मिलता है। इनमें जेपी यादव और जरीना जैसे किरदार भी अहम भूमिका निभाते हैं। बब्बन की निजी जिंदगी में मुमताज बीबी का किरदार भी कहानी का हिस्सा है, जबकि बिरजू लोहार उसकी सुरक्षा और भरोसेमंद साथी के तौर पर नजर आता है। कहानी में बब्बन एक योजना के तहत कालीन भैया को मिर्जापुर से बाहर निकालने और फिर उन्हें खत्म करने की कोशिश करता है। इसके बाद पूरी फिल्म इसी साजिश, सत्ता की लड़ाई और किरदारों के बीच टकराव के इर्द-गिर्द घूमती है।
एक्टिंग में किसने मारी बाजी?
अगर अभिनय की बात करें तो रवि किशन फिल्म के सबसे बड़े सरप्राइज बनकर सामने आते हैं। उन्हें कहानी में काफी जगह मिली है और उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया है। एक्शन हो या भावनात्मक दृश्य, रवि किशन अपने किरदार में अच्छी तरह नजर आते हैं।
पंकज त्रिपाठी एक बार फिर कालीन भैया के रूप में अपना वही रौब और ठहराव लेकर आते हैं। उनके किरदार की मौजूदगी फिल्म को ‘मिर्जापुर’ वाली पहचान देती है। वहीं मुन्ना भैया के रूप में दिव्येंदु की वापसी उन दर्शकों के लिए खास आकर्षण है, जो लंबे समय से इस किरदार को दोबारा देखना चाहते थे। उनकी बकैती और अंदाज कई जगह फिल्म में जान डालते हैं। जीतेंद्र अपने किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं और विक्रांत मैसी की गैरमौजूदगी को काफी हद तक महसूस नहीं होने देते। इसके अलावा मोहित मलिक, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, श्रिया पिलगांवकर, सुशांत सिंह और शीबा चड्ढा समेत बाकी कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं को अच्छी तरह निभाया है।
निर्देशन में कहां रह गई कमी?
फिल्म की सबसे बड़ी परेशानी इसका निर्देशन और कहानी की लंबाई नजर आती है। सीरीज में जिस तरह कहानी को कसकर आगे बढ़ाया गया था, फिल्म में वैसी पकड़ हर जगह दिखाई नहीं देती। करीब तीन घंटे का रनटाइम होने के बावजूद कई हिस्से ऐसे लगते हैं, जिन्हें या तो बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता था या फिर छोटा रखा जा सकता था। फिल्म में कई किरदारों और उनकी कहानियों को जगह देने की कोशिश की गई है, लेकिन इसी वजह से कुछ किरदारों को स्क्रीन पर पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। कहानी को बड़ा करने की कोशिश में कुछ हिस्सों में रफ्तार कम हो जाती है। यानी फिल्म में काफी कुछ है, लेकिन हर चीज को बराबर मजबूती के साथ पेश नहीं किया जा सका।
फिल्म में क्या अच्छा है?
सबसे बड़ा प्लस पॉइंट मुन्ना भैया की वापसी है। दिव्येंदु को इस लोकप्रिय किरदार में दोबारा देखना फैंस के लिए खास अनुभव है।
फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और ‘मिर्जापुर’ की पहचान बन चुकी थीम थिएटर में अलग प्रभाव पैदा करती है। एक्शन सीक्वेंस भी कई जगह मनोरंजन करते हैं। कई किरदारों के बावजूद कहानी पूरी तरह पटरी से नहीं उतरती, हालांकि बीच-बीच में इसकी गति जरूर धीमी महसूस होती है।
कहां कमजोर पड़ती है फिल्म?
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी कसावट का कम होना है। वेब सीरीज में जिस तरह हर एपिसोड दर्शकों को अगले मोड़ के लिए उत्सुक रखता था, फिल्म में वह बेचैनी हर जगह देखने को नहीं मिलती। कुछ हिस्सों में कहानी की गति काफी धीमी हो जाती है। कई घटनाओं का अंदाजा पहले ही लगने लगता है, जिससे सरप्राइज फैक्टर कम हो जाता है। क्लाइमैक्स में भी कुछ ऐसे मोड़ हैं, जिनकी दिशा दर्शक पहले से भांप सकते हैं। इसके अलावा गाने भी कुछ जगह कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय फिल्म का रनटाइम बढ़ाते हुए महसूस होते हैं।
देखें या नहीं?
अगर आप ‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज के फैन हैं और मुन्ना भैया, कालीन भैया और इस पूरी दुनिया को बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे थे, तो फिल्म आपको एक बार जरूर आकर्षित कर सकती है। मुन्ना भैया की वापसी, रवि किशन का अभिनय और बड़े पर्दे पर ‘मिर्जापुर’ का माहौल इसके मजबूत पक्ष हैं। हालांकि, अगर आप सीरीज जैसी लगातार तेज रफ्तार और जबरदस्त ट्विस्ट की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो कुछ हिस्से आपको थोड़ा निराश कर सकते हैं।













