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रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने आदिपुरुष पर व्यक्त की नाराजगी

आदिपुरुष में थीम के साथ छेड़छाड़ करके मेकर्स ने लोगों का मन खट्टा कर दिया हैं। साथ ही मनोज मुन्तशिर द्वारा लिखे इसके अमर्यादित और फूहड़ किस्म के डायलाग ने आग में घी का काम किया हैं।

आदिपुरुष को लेकर विवादों का सिलसिला टीजर रिलीज होने के बाद से ही शुरू गया था। अब फिल्म रिलीज होने के बाद विवादों का सिलसिला और बढ़ चला हैं। IMDb पर इसे 10 में मात्र 2.8 रेटिंग मिला हैं। क्रिटिक और दर्शक भी इस फिल्म को देखने के बाद अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने आदिपुरुष के मेकर्स पर क्रिएटिव फ्रीडम का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

प्रेम सागर ने अपने ऑफिसियल इंस्टाग्राम पेज SAGAR WORLD पर एक वीडियो पोस्ट कर, लंबा-चौड़ा कैप्शन भी लिखा हैं। जिसमें उन्होंने लिखा है कि पचास साल तक भी रामानंद सागर द्वारा रचित रामायण नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि फिल्ममेकिंग सिर्फ बिजनेस नहीं है। उनका मानना है कि कोई भी प्रोजेक्ट, खास तौर से एक फिल्म को अपने सिद्धांतों और नैतिकता के साथ संरेखित करने की आवश्यकता होती है।

उन्होंने आगे महत्पूर्ण बात कहा कि पापाजी(रामानंद सागर) का जन्म रामायण बनाने के लिए हुआ था, उन्हें रामायण को फिर से लिखने के लिए इस धरती पर भेजा गया था, जैसे वाल्मीकिजी ने इसे छंदों में लिखा, तुलसीदासजी ने इसे अवधी भाषा में लिखा और पापाजी ने इसे इलेक्ट्रॉनिक युग में लिखा।

उन्होंने अपने पिता रामानंद सागर द्वारा क्रिएट रामायण के बारे में कहा कि रामानंद सागर का रामायण एक ऐसा महाकाव्य था जिसे दुनिया ने अनुभव किया, और इसे लोगों के दिलों से कभी विस्थापित नहीं किया जाएगा।

आदिपुरुष के मेकर्स पर वे जमकर बरसे। उन्होंने आदिपुरुष के मेकर्स पर तथ्य अथवा मिथ्य के परे जाकर फिल्म निर्माण का आरोप लगाया। उनके अनुसार रामानंद सागर ने भी मेकिंग के दौरान क्रिएटिव फ्रीडम का इस्तेमाल किया मगर उन्होंने राम को समझा। उन्होंने तथ्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं की। प्रेम सागर ने रावण के काले पहनावे को लेकर भी बात की। उनके अनुसार रावण को विलेन के तौर पर नहीं दिखाया जा सकता हैं, रावण विद्वान और ज्ञानी थे। उन्होंने कहा कि कृतिवासी और एकनाथ ने भी रामायण लिखी थी, उन्होंने सिर्फ रंग और भाषा बदलाव किये , लेकिन ‘आदिपुरुष’ ने सारे तथ्य ही बदल दिए हैं।

जाहिर सी बात हैं कि रामायण की रचना कई भाषाओँ में हुई है, जिसके घटनाओं में कई भिन्नताएं भी पाई जाती है। मगर उसका थीम सामान हैं। लेकिन आदिपुरुष में उस थीम के साथ छेड़छाड़ करके मेकर्स ने लोगों का मन खट्टा कर दिया हैं। साथ ही मनोज मुन्तशिर द्वारा लिखे इसके अमर्यादित और फूहड़ किस्म के डायलाग ने आग में घी का काम किया हैं।

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