Cancer Risk: एक पेग से शुरू होता खतरा, कैंसर तक पहुंच सकती है बात
पिछले कुछ वर्षों में शराब पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। पहले जहां शराब को सिर्फ ज्यादा मात्रा में सेवन करने वालों से जोड़ा जाता था

Cancer Risk: पिछले कुछ वर्षों में शराब पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। पहले जहां शराब को सिर्फ ज्यादा मात्रा में सेवन करने वालों से जोड़ा जाता था, वहीं अब खुद को “सोशल ड्रिंकर” या “लिमिट में पीने वाला” मानने वाले लोग भी स्वास्थ्य जोखिमों की जद में आ रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो रोजाना सिर्फ एक पेग शराब पीना भी मुंह के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।
आमतौर पर मुंह के कैंसर को धूम्रपान, गुटखा, खैनी या पान चबाने जैसी आदतों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, हालिया शोध और मेडिकल रिपोर्ट्स यह संकेत देती हैं कि शराब का सेवन भी इस बीमारी का एक बड़ा कारण बन सकता है। कई लोग यह मानते हैं कि यदि वे तंबाकू का सेवन नहीं करते हैं, तो उन्हें मुंह के कैंसर का खतरा नहीं है, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।
सेंटर फॉर कैंसर एपिडेमियोलॉजी एंड होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट की एक रिसर्च के अनुसार, भारत में मुंह के कैंसर के मामलों में से बड़ी संख्या शराब और तंबाकू उत्पादों के सेवन से जुड़ी हुई है। अध्ययन में पाया गया कि देश में होने वाले लगभग 60 प्रतिशत से अधिक मुंह के कैंसर के मामलों में शराब और धुआं रहित तंबाकू की भूमिका होती है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि शराब का नियमित सेवन अकेले भी कैंसर के खतरे को काफी हद तक बढ़ा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, शराब शरीर में पहुंचकर एसीटैल्डिहाइड नामक एक जहरीले केमिकल में बदल जाती है। यह तत्व मुंह की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, शराब मुंह के टिशूज को कमजोर कर देती है, जिससे हानिकारक तत्व आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। शराब लार के उत्पादन को भी कम करती है, जबकि लार मुंह को बैक्टीरिया और इंफेक्शन से बचाने में अहम भूमिका निभाती है। लार की कमी से सूजन, जलन और कोशिकाओं के रिपेयर की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
मुंह के कैंसर के लक्षणों को शुरुआती चरण में पहचानना बेहद जरूरी है। इसके सामान्य संकेतों में मुंह के अंदर लंबे समय तक सफेद या लाल रंग के पैच बने रहना, मुंह खोलने में दिक्कत, बिना किसी स्पष्ट कारण के खून आना, दांतों का ढीला होना और खाने-पीने के दौरान दर्द शामिल हैं। यदि ये लक्षण दो से तीन सप्ताह तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर पहचान और सही इलाज से मुंह के कैंसर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए शराब के सेवन में सावधानी बरतना और नियमित रूप से मुंह की जांच कराना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी प्रकार की बीमारी, इलाज, डाइट या लाइफस्टाइल में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। वेबसाइट किसी भी चिकित्सा दावे की पुष्टि नहीं करती है।
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