ठंड और धूप की कमी से युवाओं में बढ़ रहा अवसाद, बढ़ी मरीजों की संख्या

एमएमजी अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, इन दिनों प्रतिदिन औसतन 120 से 125 मरीज मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड और कई दिनों तक धूप न निकलने की स्थिति अब केवल शारीरिक परेशानियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिल रहा है। खासतौर पर युवा वर्ग और वे लोग जो पहले अवसाद या मानसिक तनाव का सामना कर चुके हैं, इस मौसम में दोबारा गंभीर लक्षण महसूस कर रहे हैं। अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

एमएमजी अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, इन दिनों प्रतिदिन औसतन 120 से 125 मरीज मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हाल के सप्ताहों में ऐसे मरीजों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, जो पहले इलाज के बाद सामान्य जीवन जी रहे थे, लेकिन सर्दियों के दौरान फिर से अवसाद के लक्षणों से जूझने लगे हैं।

उदासी, चिड़चिड़ापन और थकान आम लक्षण

अस्पताल पहुंच रहे मरीजों में लगातार उदासी रहना, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, थकान, नकारात्मक सोच, आत्मविश्वास में कमी और रोजमर्रा के कामों में मन न लगना जैसे लक्षण आम पाए जा रहे हैं। कई मरीजों को नींद न आने और भूख में कमी की भी शिकायत है। चिकित्सकों के अनुसार, सर्दियों में लोग घरों में ज्यादा समय बिताने लगते हैं। शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और सामाजिक संपर्क भी घट जाता है। यह सभी कारण मिलकर मानसिक स्थिति को कमजोर बना देते हैं, जिससे अवसाद का खतरा बढ़ जाता है।

सर्दियों में हार्मोनल असंतुलन बनता है कारण

एमएमजी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. साकेतनाथ तिवारी बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में शरीर के भीतर कई न्यूरोलॉजिकल और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जो मूड को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसके साथ ही स्ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल का संतुलन भी बिगड़ सकता है। इन बदलावों का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है और अवसाद के लक्षण दोबारा उभरने लगते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि ठंड के कारण कई मरीज घर से बाहर निकलना कम कर देते हैं, जिससे दवाइयों और इलाज का असर भी अपेक्षाकृत कम हो जाता है। एमएमजी अस्पताल के मन प्रकोष्ठ में कार्यरत क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. चंदा यादव के अनुसार, इस मौसम में कई मरीज सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) से प्रभावित हो रहे हैं। सर्दियों में दिन छोटे हो जाना, धूप की कमी और बिगड़ी दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हैं। इसका असर नींद, भूख और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है। समय रहते काउंसलिंग और इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

राजनगर एक्सटेंशन निवासी 38 वर्षीय इंजीनियर, जो पिछले तीन वर्षों से अवसाद का इलाज करा रहे हैं, बताते हैं कि गर्मियों में उनकी स्थिति सामान्य रहती है, लेकिन सर्दी शुरू होते ही बेचैनी और उदासी बढ़ जाती है। नींद पूरी नहीं होती और किसी भी काम में मन नहीं लगता। वहीं, लोहिया नगर की 45 वर्षीय गृहिणी, जो ढाई साल के इलाज के बाद सामान्य हो चुकी थीं, सर्दी बढ़ते ही फिर से थकान, निराशा और डर महसूस करने लगीं। समय पर अस्पताल पहुंचने और इलाज शुरू होने से उनकी स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

सावधानी और मदद जरूरी

एमएमजी अस्पताल के मन प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि सर्दियों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। नियमित दिनचर्या, हल्का व्यायाम, सामाजिक संपर्क बनाए रखना और रोजाना कुछ समय धूप में बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह की मानसिक परेशानी महसूस होने पर टेली मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है, जहां निशुल्क काउंसलिंग और आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध है।

Tez Tarrar News

Gagandeep Singh

गगनदीप सिंह तेज़ तर्रार न्यूज़ चैनल में बतौर कंटेंट राइटर कार्य कर रहे है। जहां ये दिल्ली से जुड़ी सारी क्राइम की खबरें निडर होकर अपने लेख से लोगों तक… More »
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