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भारत में नकली दवाओं को बेचने के चलते अब बारकोड से होगी असली की पहचान

भारत में नकली दवाइयां बेचीं जा रही जा रही है, जिसके चलते अब दवाओं के पैकेट पर बारकोड या क्यूआर कोड लगना शुरू हो जायेंगे

देश में तकरीबन सभी के द्वारा दवाई का सेवन किया जाता है जिसके चलते एक खबर सामने आयी है कि भारत में नकली दवाइयां बेचीं जा रही जा रही है। जिसके चलते अब इसमें सतर्कता दिखानी शुरू हो गयी है क्योकि अब दवाओं के पैकेट पर बारकोड या क्यूआर कोड लगना शुरू हो जायेंगे। जानिए पूरी खबर

बता दें कि देश में बहुत समय से नकली दवाइयां बिक रही है जो लोगों को ठीक करने के बदौलत उनकी तबीयत और बिगाड़ सकती है और अब इसी के चलते केंद्र सरकार जल्द ही बड़ा कदम उठा सकती है जहां भारतीय बाजार में बिकने वाले सभी दवा निर्माताओं से दवाओं के पैकेट पर बारकोड या क्यूआर कोड प्रिंट कर चिपकाने के लिए कहा जा सकता है।

यह कदम भारत में बेचे जा रहे नकली उत्पादों या नकली दवाओं की चुनौती को खत्म कर देगा। इसके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पहले के अनुमान के मुताबिक, दुनिया भर में बिकने वाली करीब 35 फीसदी नकली दवाएं भारत से आती हैं जिसका मतलब साफ़ है कि लोगों को वो वही दवाइयां बेचीं जा रही है।

रिपोर्ट्स द्वारा पता चला है कि इन सब को देखते हुए सभी तैयारियां कर ली गई हैं और अगले कुछ हफ्तों में इसे लागू कर दिया जाएगा, चूंकि यह कदम अनिवार्य होगा। ऐसे में भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाइयां है एलेग्रा, डोलो, ऑगमेंटिन, सेरिडोन, कैलपोल और थायरोनॉर्म शामिल हैं।

भारत में बेची जाती है 20% नकली दवाइयां

रिपोर्ट में देखा गया है कि भारतीय बाजार में बिकने वाली सभी फार्मास्युटिकल सामानों में से लगभग 20 प्रतिशत नकली हैं। भारत के बढ़ते फार्मास्युटिकल बाजार और ‘दुनिया के लिए फार्मेसी‘ होने की इसकी दशकों पुराने प्रभाव को देखते हुए एक हानिकारक दावा है, जबकि बार कोड को रोल आउट करने का कदम 2016 से चल रहा था, इसे अब लागू किए जाने की संभावना है।

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Abhishikt Masih

अभिषिक्त मसीह तेज़ तर्रार न्यूज़ चैनल में बतौर कंटेंट राइटर कार्य कर रहे है। इन्होने अपने लेख से सच्ची घटनाओं को लिखकर लोगों को जागरूक किया है।

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