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बढ़ते प्रदूषण में बढ़ रहा सीओपीडी का खतरा, एक्सपर्ट से जानें बचाव का तरीका

देशभर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा दिया है। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) इन्हीं में से एक है।

World COPD Day 2023 देशभर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा दिया है। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) इन्हीं में से एक है। हर साल इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से वर्ल्ड सीओपीडी डे मनाया जाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं इस बीमारी से जुड़ी सभी जरूरी बातें और बचाव का तरीका

नई दिल्ली। World COPD Day 2023: देशभर में लगे पटाखों पर बैन के बावजूद लोगों ने जमकर पटाखों के साथ दिवाली मनाई और अब इसका असर वातावरण में देखने को मिल रहा है। दिवाली के बाद से ही दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई हिस्सों में हवा का स्तर बेहद खराब हो चुका है। ऐसे में जहरीली हवा में सांस लेने की वजह से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) इन्हीं में से एक है। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसके प्रति जारूकता फैलाने के मकसद से हर साल वर्ल्ड सीओपीडी डे (World COPD Day) मनाया जाता है।

यह दिन हर साल नवंबर के तीसरे बुधवार को मनाया जाता है। इस मौके पर इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानने और वायु प्रदूषण के इसके कनेक्शन के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने मैक्स हॉस्पिटल गुड़गांव के पल्मोनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार और एचओडी डॉ. नेविन किशोर से बातचीत की।

सीओपीडी का कारण कैसे बनता है प्रदूषण?

डॉक्टर के मुताबिक वायु प्रदूषण क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। वायु प्रदूषक एल्वियोलर लेवल पर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। एल्वियोली वह थैली होती हैं, जहां कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन गैस का एक्सचेंज होता है। ऐसे में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर की वजह से इन एल्वियोली को नुकसान हो सकता है, जो सीओपीडी का कारण बनता है।

सूक्ष्म कण यानी फाइन पर्टिकुलेट मैटर (पीएम2.5) और अन्य प्रदूषक फेफड़ों में अंदर तक प्रवेश कर सकते हैं, जिससे एयरवेज में सूजन और जलन हो सकती है। हवा में मौजूद इन प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से ऑक्सीडेटिव तनाव और फेफड़ों के टिशूज को नुकसान हो सकता है। खासतौर पर पहले से रेस्पिरेटरी संबंधी समस्याओं वाले व्यक्ति वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

सीओपीडी के सामान्य लक्षणों में निम्न शामिल हैं-

  • खांसी
  • थकान
  • घरघराहट
  • सांस फूलना
  • सीने में जकड़न
  • सांस लेने में तकलीफ
  • कभी-कभी सीने में दर्द

इन तरीकों से करें सीओपीडी से बचाव

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) को रोकने और इससे बचने के लिए सबसे पहले जरूरी है अपने फेफड़ों की रक्षा करना।

  1. फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए सबसे जरूरी है तंबाकू के धुएं यानी धूम्रपान से बचना। धूम्रपान बंद करने और सेकंड हैंड स्मोकिंग से बचने से सीओपीडी के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।
  2. इसके अलावा प्रदूषण से बचने के लिए जरूरी कदम उठाना, सभी जरूरी गाइडलाइंस को फॉलो करना और कम से कम प्रदूषकों के संपर्क में आकर भी इसका खतरा कम कर सकते हैं।
  3. अपने घर के अंदर हवा का स्तर बेहतर बनाए रखने के लिए पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था करें। साथ ही क्लीनिंग एजेंट और खाना बनाने के दौरान होने वाले धुएं के संपर्क को कम कर आप इनडोर एयर क्वालिटी को बेहतर बनाए रख सकते हैं।
  4. व्यायाम की मदद से भी आप अपने फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा इन्फ्लूएंजा और निमोनिया का टीका लगाकर भी सीओपीडी को खराब करने वाले रेस्पिरेटरी संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है।
  5. सीओपीडी को रोकने के लिए एलर्जी और अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियों को मैनेज करना, नियमित जांच कराना और निर्धारित दवाओं का समय से सेवन करना जरूरी है।

 

 

 

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