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अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक संसद ने सत्र के पहले दिन किया पारित

यह संशोधन लीगल प्रैक्टिशनर अधिनियम 1879 के तहत अभिकर्ता या दलालों से संबंधित कुछ धाराओं को करता है निरस्‍त, डाकघर विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी

संसद ने अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2023 को पारित किया है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने इसे मंजूरी दे दी है। यह विधेयक अधिवक्ता अधिनियम 1961 में संशोधन करता है।

 

यह विधेयक लीगल प्रैक्टिशनर अधिनियम 1879 के तहत अभिकर्ता या दलालों से संबंधित कुछ धाराओं को निरस्‍त करता है। अब उच्च न्‍यायालयों में जिला न्‍यायाधीश, सत्र न्‍यायाधीश, जिला मजिस्‍ट्रेट और राजस्‍व अधिकारी दलालों की सूची तैयार या जारी कर सकते हैं।

 

अब अदालत या न्यायाधीश दलाल सूची में शामिल किसी भी व्‍यक्ति को अदालत परिसर से निष्कासित कर सकते हैं। दलाल सूची में नाम आने के बावजूद दलाली करने वाले को तीन महीने तक की कैद या 500 रुपये जुर्माना या दोनों सजा एक साथ हो सकती है।

 

विधेयक पेश करते हुए विधि और न्‍याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सुगम जीवन मोदी सरकार का लक्ष्‍य है। उन्‍होंने कहा कि उपनिवेश काल का कानून अनुपयोगी है और इसलिए इसे निरस्त किया जा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्‍य अदालत परिसर को दलालों से मुक्त रखना है।

 

चर्चा में कांग्रेस के कार्ति चिदंबरम ने विधेयक का स्वागत किया। तृणमूल कांग्रेस के कल्‍याण बनर्जी ने अदालतों में बड़ी संख्‍या में लम्बित मामलों का मुद्दा उठाया।

 

राज्यसभा ने विस्‍तृत चर्चा के बाद ‘डाकघर विधेयक 2023’ पारित किया। इस विधेयक के अनुसार सरकार, सुरक्षा सहित विशेष कारणों से डाक से भेजी गई किसी भी सामग्री को जांच के लिए रोक सकती है।

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