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एक मासूम रोते हुए ढूंढ रहा है अपने माता-पिता, मलबे में दबा पूरा परिवार

मम्मी-पापा कहां गए हैं। दीदी कहां गई...। मासूम लक्ष्य मासूमियत से तोतली जुबान में यह सवाल बार-बार अपनी बुआ से पूछता रहता ...

आज हम आपको मासूम लक्ष्य के बारे में बताएँगे जिसने छोटी सी उम्र में अपना सब कुछ खो दिया सुबह उठते ही सबसे पहले उसको याद आई दीदी ईशिता। उसने बुआ से पूछा कहां है दीदी। इस घटना के बाद से परिवार में बचे लक्ष्य को लोगों से अलग पड़ोस के घर में बुआ मोनिका के साथ छोड़ दिया गया।

मम्मी-पापा कहां गए हैं। दीदी कहां गई…। मासूम लक्ष्य मासूमियत से तोतली जुबान में यह सवाल बार-बार अपनी बुआ से पूछता रहता है तो वह भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। उस मासूम के सवालों का जवाब कौन देगा उसके परिवार के पांचों सदस्यों के हमेशा के लिए चले जाने से तीन साल के बच्चे की मासूमियत हर किसी को रुला रही थी।

समझ नहीं का रहा था कि बच्चे के सवाल का क्या जवाब दें। फिर उसे बहलाने के लिए सिर्फ इतना कहा कि उसकी बहन शिलाई गई है। बुआ का जवाब सुनने के बाद लक्ष्य रोज की तरह अपनी अठखेलियों में लग गया। सुबह से ही घर में सांत्वना देने वालों का तांता लगना भी शुरू हो गया।

इस बीच सांत्वना देने पहुंचे लोग भी जब लक्ष्य से मिलने पहुंचते तो मासूम के सवाल भी उनकी भी आंखें गीली कर देते। उस मासूम का दिल बहलाने के लिए बुआ ने तमाम कोशिशें की। कभी मोबाइल देकर उसे व्यस्त रखा तो कभी कलेजे से लगाकर उसे बहन और मां-बाप की प्यार देने की कोशिश की। लेकिन बाद में उसने फिर से माँ-बाप और बहनों को ढूंढना शुरू कर दिया।

सभी लोग ये ही सोच में डूबे रहे कि आज का दिन तो चलो बीत जाएगा लेकिन आने वाले दिनों में वह लक्ष्य के सवालों का कैसे सामना करेंगे। मोनिका ने बताया कि मासूम दिनभर अपनी तीनों बहनों और माँ-बाप को ढूंढता रहा। हालांकि, लक्ष्य ने किसी बात पर कोई जिद्द नहीं की फिर कहीं न कहीं उसकी आंखों में मां-बाप की तलाश दिख रही थीं।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य का ज्यादा से ज्यादा समय अपने दादा दौलतराम और दादी मेहंदी देवी के साथ ही गुजरता है। लिहाजा, आज उसके स्व. भाई प्रदीप की आखिरी निशानी के तौर पर लक्ष्य ही परिवार में जीवित बचा है, जो इस हादसे के दिन दूसरे घर में अपने दादा-दादी के पास ही सोया था।

आप को बता दें कि शिलाई उपमंडल के रोनहाट के समीप खिजवाड़ी गांव का लक्ष्य अपने पिता प्रदीप और माता ममता और अपनी तीन बहनों ईशिता (8), अलीशा (6) व ऐरंग (2) को एक दर्दनाक हादसे में हमेशा के लिए इन सब को खो चुका है। एक तरफ तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है, और वही दूसरी तरफ तीन साल के मासूम की जिम्मेदारी भी उन पे आ गई।

ये हादसा रोनहाट उपतहसील की ग्राम पंचायत रास्त में भूस्खलन से मकान के मलबे के नीचे दबने से हुआ है। 27 वर्षीय ममता 7 महीने की गर्भवती थी। खिजवाड़ी गांव के समीप राकसोड़ी नामक में मलबे के नीचे दबने से चार बच्चों सहित दंपती की मौत हो गई थी।

हादसे के दौरान मृतक ममता सात महीने की गर्भवती भी थी। इस हादसे में छह नहीं, बल्कि सात लोगों की मौत हुई है। सभी लोगों ने सरकार और प्रशासन से ये मांग की है कि पीड़ित परिवार को मिलने वाला मुआवजा छह सदस्यों का नहीं, बल्कि सात सदस्यों का दिया जाना चाहिए उन्होंने बताया कि परिवार का आखिरी वारिस लक्ष्य महज तीन वर्ष का है इतनी सी छोटी उम्र में उसके सिर से मां-बाप और तीन बहनों का साया उठ गया। लोगो ने स्थानीय प्रशासन और सरकार से पीड़ित परिवार को मुआवजा राशि देने का आग्रह किया है।

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