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पति ने किया पत्नी के साथ दुष्कर्म तो पत्नी करा सकती है गर्भपात, जानें सबकुछ

वैवाहिक दुष्कर्म क्या होता है और इसे लेकर भारत का कानून क्या कहता है? कोनसे देशों में ये अपराध है? और कितने देश ऐसे हैं जहां वैवाहिक...

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार के दिन कहा है कि पति द्वारा किया जाने वाले दुष्कर्म यानी वैवाहिक दुष्कर्म की दशा में 24 सप्ताह की तय सीमा में पत्नी अपना गर्भपात करा सकती है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत इसे शामिल किया जाना चाहिए।

यह अधिकार सिर्फ उन महिलाओं के लिए राहतकारी होगा, जो अनचाहे गर्भ को जारी रखने को विवश हैं। चाहे वो महिलाएं विवाहित हों या अविवाहित हों। वैवाहिक दुष्कर्म होता क्या है और इसे लेकर भारत का कानून क्या कहता है? कोनसे देशों में ये अपराध है? और कितने ऐसे देश हैं जहां वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध नहीं माना जाता? और सरकार का इसे लेकर क्या रुख है?

और भारत (India) में वैवाहिक दुष्कर्म का शिकार होने वाली महिला के पास क्या कानूनी रास्ते हैं? आइये समझते हैं जब एक पुरुष अपनी पत्नी की बिना सहमति के जबरन संबंध बनाता है तो इसे वैवाहिक दुष्कर्म कहा जाता है। और इस अपराध के लिए पति किसी भी तरह का बल का प्रयोग करता है, या पत्नी किसी ऐसे शख्स को जिसकी पत्नी परवाह करती हो उसको चोट पहुंचाने का डर दिखाता है।

दुष्कर्म के मामले में अगर दुष्कर्म करने वाला आरोपी महिला का पति है तो उस पर दुष्कर्म का केस दर्ज नहीं हो सकता है। IPC की धारा 375 में दुष्कर्म को परिभाषित किया गया है। और इसमें वैवाहिक दुष्कर्म को अपवाद बताया गया है। धारा 375 के अनुसार अगर पत्नी की उम्र 18 साल से ज्यादा है तो पति द्वारा बनाया गया संबंध दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। भले ही इसके लिए पति ने अपनी पत्नी की मर्जी के खिलाफ जाकर जबरदस्ती की हो।

इस तरह की प्रताड़ना का शिकार हुई महिला अपने पति के खिलाफ सेक्शन 498A के तहत यौन हिंसा का मामला दर्ज करा सकती है। अगर इसमें महिला को चोट आई है तो महिला IPC की धाराओं में भी मुकदमा दर्ज करा सकती है। इसके साथ ही वर्ष 2005 के घरेलू हिंसा के खिलाफ बने कानून में भी महिलाएं अपने पति पर यौन हिंसा का केस दर्ज करा सकती हैं।

वर्ष 2017 में, दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने ये कहा था कि वैवाहिक दुष्कर्म का अपराधीकरण भारतीय समाज में विवाह की व्यवस्था को “अस्थिर” कर सकता है। यह कानून पत्नियों को पति के उत्पीड़न के हथियार के रूप में काम करेगा। वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने एक कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध घोषित करने की कोई भी जरूरत नहीं है।

लेकिन, मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे अपराध घोषित करने की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात को लेकर गुरुवार को सुनाए गए एक अहम फैसले में कहा है कि पति द्वारा किया जाने वाला दुष्कर्म ‘मैरिटल रेप‘ की दशा में भी 24 सप्ताह की तय सीमा में उसकी पत्नी गर्भपात करा सकती है। यह अधिकार सिर्फ उन महिलाओं के लिए राहतकारी होगा, जो अनचाहे गर्भ को जारी रखने के लिए विवश हैं। पोलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश है जहां वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध माना गया।

वर्ष 1932 में पोलैंड में वैवाहिक दुष्कर्म के खिलाफ कानून आया था। वर्ष 1970 तक स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क, सोवियत संघ, चेकोस्लोवाकिया इन देशों ने भी इसे अपराध घोषित कर दिया था। वर्ष 1976 में ऑस्ट्रेलिया (Australia) और 80 के दशक में साउथ अफ्रीका, आयरलैंड, कनाडा और अमेरिका, न्यूजीलैंड, मलेशिया, घाना और साथ में इजराइल भी इस लिस्ट में शामिल हो गए।

संयुक्त राष्ट्र की प्रोग्रेस ऑफ वर्ल्ड वुमन रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 तक दुनिया के 185 देशों में सिर्फ 77 देश ही ऐसे थे जहां पर वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध घोषित करने को लेकर स्पष्ट कानून हैं। इसके आलावा बाकी 108 देशों में से 74 ऐसे देश हैं जहां महिलाओं के लिए अपने पति के खिलाफ रेप के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने के प्रावधान हैं।

वहीं, 34 देश ऐसे भी हैं जहां न तो वैवाहिक दुष्कर्म अपराध है और ना ही महिला अपने पति के खिलाफ दुष्कर्म के लिए आपराधिक शिकायत दर्ज कर सकती हैं। इन कुल 34 देशों में भारत भी शामिल है। दुनिया के 12 देशों में इस तरह के प्रावधान हैं जिसमें रेप का अपराधी अगर महिला से शादी कर लेता है तो उसे आरोपों से बरी कर दिया जाता है। यूएन इसे बेहद भेदभावपूर्ण व मानवाधिकारों के खिलाफ मानता है। संयुक्त राष्ट्र वर्ष 2019 में ही दुनियाभर के देशों से वैवाहिक दुष्कर्म पर सख्त कानून बनाने की अपील कर चुका है।

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