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राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए कानून बदलना जरूरी : आयोग

गंभीर मामले में आरोप तय होने के बाद चुनाव लड़ने पर रोक की गुहार वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आयोग ने हलफनामे में ये बात कही।

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए पहले कई बार वह सिफारिश कर चुका है। अपराधीकरण रोकने के लिए कानून में बदलाव करना होगा और यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। गंभीर मामले में आरोप तय होने के बाद चुनाव लड़ने पर रोक की गुहार वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आयोग ने हलफनामे में ये बात कही। कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया है। सुनवाई के लिए जुलाई के पहले हफ्ते की तारीख तय की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में याची वकील अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने जस्टिस के. एम. जोसेफ की अगुआई वाली बेंच से कहा कि उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का वक्त चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने यह मौका देते हुए जुलाई की तारीख तय कर दी।

इसी दौरान चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश किया गया। चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि लॉ कमिशन ने कहा था कि जिन भी सांसद या विधायक का मामला ट्रायल कोर्ट में पेंडिंग है उन मामलों में सुनवाई में तेजी हो और ट्रायल रोज हो। एक साल में ट्रायल पूरा किया जाए और अगर एक साल में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो संबंधित जज इसके लिए संबंधित हाई कोर्ट को कारण बताएं। साथ ही चुनाव आयोग ने कहा कि रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट की धारा-8 के तहत अयोग्यता की कार्रवाई होती है।

Accherishtey

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Gagandeep Singh

गगनदीप सिंह तेज़ तर्रार न्यूज़ चैनल में बतौर कंटेंट राइटर कार्य कर रहे है। जहां ये दिल्ली से जुड़ी सारी क्राइम की खबरें निडर होकर अपने लेख से लोगों तक पहुंचाते है

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