Sonam Wangchuk: मंत्री बनने की बात पर खुलकर बोले, बताया क्या करेंगे
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक हालिया पॉडकास्ट में देश की शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक ढांचे को लेकर अपनी राय साझा की।

Sonam Wangchuk: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक हालिया पॉडकास्ट में देश की शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक ढांचे को लेकर अपनी राय साझा की। बातचीत के दौरान उनसे यह भी पूछा गया कि अगर उन्हें देश का शिक्षा मंत्री बनने का अवसर मिले तो वह क्या बदलाव करना चाहेंगे। इस पर वांगचुक ने कहा कि उनकी दिलचस्पी किसी सरकारी पद या राजनीतिक ओहदे में नहीं है।
वांगचुक का कहना था कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में केवल किसी व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बना देने से शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर बदलाव करना आसान नहीं होगा। उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को लंबे समय से चली आ रही समस्या बताया।
सरकार और कांग्रेस दोनों पर उठाए सवाल
पॉडकास्ट में सोनम वांगचुक ने वर्तमान सरकार के साथ-साथ पिछली कांग्रेस सरकारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा से जुड़ी समस्याएं केवल हाल के वर्षों की देन नहीं हैं।
उनके मुताबिक, गांवों और गरीब तबके के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की चुनौती आजादी के बाद से ही बनी हुई है। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद गरीब और आम लोगों की शिक्षा को वह प्राथमिकता नहीं मिल सकी, जिसकी जरूरत थी।
शिक्षा मंत्री बनने में क्यों नहीं दिखती दिलचस्पी?
वांगचुक ने राजनीतिक व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जब संसद और राजनीति में आपराधिक मामलों से जुड़े नेताओं की मौजूदगी जैसे मुद्दे बने हुए हों, तब शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दिलाना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने संकेत दिया कि ऐसी व्यवस्था में किसी बड़े पद पर बैठने के बजाय वह व्यवस्था में व्यापक बदलाव को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके मुताबिक, सिर्फ पद हासिल करने से शिक्षा व्यवस्था की जटिल समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
2047 के भारत को लेकर भी रख चुके हैं विचार
सोनम वांगचुक इससे पहले भी देश की राजनीतिक व्यवस्था और भविष्य को लेकर अपनी राय सामने रख चुके हैं। 13 अगस्त को जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने 2047 तक भारत को एक सम्मानित और मजबूत राष्ट्र बनाने के लिए नेतृत्व चुनने की प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत बताई थी।
उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से बड़े बदलाव की बात करते हुए नागरिकों से ऐसे योग्य और निःस्वार्थ लोगों के नाम सुझाने की अपील की थी, जो देश के भविष्य के लिए बेहतर नेतृत्व दे सकें।
पद से ज्यादा व्यवस्था में बदलाव पर जोर
वांगचुक के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि उनका फोकस किसी खास सरकारी पद को हासिल करने के बजाय शिक्षा और राजनीतिक व्यवस्था में बुनियादी सुधार पर है। उनका मानना है कि देश की शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को दूर करने के लिए केवल मंत्री बदलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थागत कमियों पर काम करना जरूरी है।
यानी शिक्षा मंत्री बनने के सवाल पर सोनम वांगचुक ने पद की इच्छा जताने के बजाय मौजूदा व्यवस्था की सीमाओं और उसमें व्यापक सुधार की जरूरत को सामने रखा।









