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सिलक्यारा सुरंग रेस्क्यू ऑपरेशन में वैकल्पिक मार्ग पर भी हो रहा काम

24 अनुभवी "रैट-होल माइनिंग" विशेषज्ञों की एक टीम मैनुअल ड्रिलिंग प्रक्रिया में है शामिल,श्रमिक रेस्क्यू टीम से महज 5 मीटर दूर

रैट-होल माइनर्स ने उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिल्क्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए एक मैन्युअल ड्रिलिंग अभियान शुरू किया है। इस अभियान में 24 अनुभवी रैट-होल माइनिंग विशेषज्ञों की टीम शामिल है। उन्होंने मलबे को हटाने और रास्ता बनाने का काम शुरू किया है ताकि श्रमिकों को सुरंग से बाहर निकाला जा सके।

 

रैट माइनर्स एक टीम हैं जो सुरंग में फंसे हुए श्रमिकों की ओर मार्ग खोजने के लिए संकीर्ण मार्ग की खुदाई कर रहे हैं। श्रमिकों तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग भी तैयार किया जा रहा है।

 

माइनिंग विशेषज्ञों का कहना है कि वर्टिकल ड्रिलिंग के दौरान पानी के रोडे की वजह से ड्रिलिंग में बाधा उत्पन्न हुई थी, जिसे ठीक कर रहे हैं।

 

माइक्रो टनलिंग विशेषज्ञ क्रिस कूपर ने बताया कि उनका काम बहुत अच्छे से चल रहा है। उन्होंने सुरंग में 50 मीटर तक काम किया है और अब लगभग 5-6 मीटर बचे हैं। उनके अनुसार, इससे श्रमिकों को बचाने में मदद मिलेगी।

 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बताया कि वर्टिकल ड्रिलिंग ऑपरेशन पहले ही 36 मीटर की गहराई तक पहुंच चुका है। उन्होंने बारिश की संभावना और तापमान की गिरावट के कारण अभियान में अतिरिक्त बाधाएं आ सकती हैं।

 

सिल्क्यारा सुरंग का महत्व उत्तराखंड के चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना में होने वाले एक अहम हिस्से के रूप में भी है, जो इस सुरंग के करीब स्थित है।

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