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राहुल गांधी को रायबरेली और वायनाड में से एक सीट की सदस्यता छोड़नी होगी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को अब एक महत्वपूर्ण फैसला लेना है। उन्हें उत्तर प्रदेश की रायबरेली और केरल की वायनाड में से किसी एक सीट की सदस्यता छोड़नी होगी। यह निर्णय उन्हें 18 जून तक चुनाव आयोग को सूचित करना होगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को अब एक महत्वपूर्ण फैसला लेना है। उन्हें उत्तर प्रदेश की रायबरेली और केरल की वायनाड में से किसी एक सीट की सदस्यता छोड़नी होगी। यह निर्णय उन्हें 18 जून तक चुनाव आयोग को सूचित करना होगा।

राहुल गांधी ने हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव 2024 में दोनों सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। रायबरेली में उन्होंने चार लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की, जबकि वायनाड में भी उन्होंने बड़ी जीत हासिल की है।

रायबरेली: ऐतिहासिक और भावनात्मक जुड़ाव

रायबरेली सीट गांधी परिवार के लिए ऐतिहासिक महत्व रखती है। 1952 से यह सीट गांधी परिवार के कब्जे में रही है। इस सीट को छोड़ने से उत्तर प्रदेश की जनता में गलत संदेश जा सकता है और कांग्रेस को यहां अपनी पकड़ कमजोर होने का डर है। राहुल गांधी के लिए रायबरेली सीट छोड़ना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि उत्तर प्रदेश से दिल्ली का रास्ता गुजरता है। इस बार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने 80 में से 2 सीटें जीती हैं, जिससे पार्टी को उम्मीद मिली है कि वे राज्य में अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं।

वायनाड: दक्षिण भारत में पकड़

वायनाड सीट छोड़ने पर कांग्रेस को केरल में नुकसान हो सकता है, जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस सीट पर राहुल गांधी की उपस्थिति कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है। अगर राहुल वायनाड छोड़ते हैं, तो यह सीट IUML (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) को देनी पड़ सकती है, जिससे दक्षिण भारत में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो सकती है। केरल को दक्षिण का द्वार माना जाता है और यहां से बाकी राज्यों को कांग्रेस साध सकती है।

संभावित विकल्प

यदि राहुल गांधी वायनाड सीट छोड़ते हैं, तो कांग्रेस प्रियंका गांधी को यहां से उपचुनाव में उतार सकती है। यह सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित मानी जाती है, जिससे पार्टी का दबदबा बना रह सकता है। दूसरी ओर, रायबरेली सीट छोड़ने से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो सकती है और वहां का क्रेडिट समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को मिल सकता है।

राहुल गांधी ने अभी तक अपने फैसले की घोषणा नहीं की है। 4 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि वे दोनों जगहों के मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और जल्द ही निर्णय लेंगे।

अब देखना होगा कि राहुल गांधी किस सीट को छोड़ने का फैसला करते हैं और किसे अपने पास रखते हैं। फैसले के लिए उनके पास अब एक ही दिन का वक्त बाकी है।

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