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4 अगस्त को लोकसभा द्वारा पारित अंतर-सेवा संगठन विधेयक आज राज्यसभा में भी पारित

यह विधेयक सेना, नौसेना और वायु सेना कर्मियों और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य बलों के व्यक्तियों पर लागू होगा, जो किसी अंतर-सेवा संगठन में सेवारत हैं या उससे जुड़े हैं।

अंतर-सेवा संगठन विधेयक 2023 बीते 4 अगस्त को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। जिसके बाद राज्यसभा ने मंगलवार को अंतर-सेवा संगठन (कमांड, नियंत्रण और अनुशासन) विधेयक, 2023 पारित कर दिया, जो अंतर-सेवा संगठनों (आईएसओ) के कमांडर-इन-चीफ और अधिकारियों को अनुशासनात्मक और ऐसे संगठनों में सेवारत अन्य बलों के कर्मियों पर प्रशासनिक शक्ति को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।

इस विधेयक के बाद भविष्य के युद्धों से लड़ने के लिए सेना के संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग और सशस्त्र बलों के कामकाज में सुधार होगा। उच्च सदन में विधेयक की शुरुआत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, सशस्त्र बलों को मजबूत करने को जरूरी बताया और इस बात पर जोर दिया कि इससे तीनों सेवाओं के बीच बेहतर एकीकरण और एकजुटता आ पायेगा, जिसके जरिये सेना राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि यह भारत के सैन्य सुधारों की राह में एक मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा कि आज का युद्ध पारंपरिक नहीं रह गया है, बल्कि प्रौद्योगिकी और नेटवर्क केंद्रित हो गया है, जिससे देश के सामने आने वाली भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सेनाओं को अधिक समन्वय से काम करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

यह विधेयक सेना, नौसेना और वायु सेना कर्मियों और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य बलों के व्यक्तियों पर लागू होगा, जो किसी अंतर-सेवा संगठन में सेवारत हैं या उससे जुड़े हैं। वर्तमान में, सशस्त्र बल कर्मियों को उनके विशिष्ट सेवा अधिनियमों – सेना अधिनियम 1950, नौसेना अधिनियम 1957 और वायु सेना अधिनियम 1950 में निहित प्रावधानों के अनुसार शासित किया जाता है। इस विधेयक से कई लाभ सुझाए गए हैं। यह मुख रूप से तीनों सेना के बीच सामंजस्य स्थापित कर प्रभावी अनुशासन बनाए रखने में मददगार साबित होगी।

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