25 September हिन्दू पंचांग : जानें क्या है श्राद्ध में भोजन कराने का विधान

आज का हिन्दू पंचांग : आज के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और व्रत पर्व विवरण के साथ जानें कैसे होगा पितरों का उद्धार

दिनांक 25 सितम्बर 2021

दिन – शनिवार

विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)

शक संवत -1943

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – शरद

मास -अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार – भाद्रपद)

पक्ष – कृष्ण

तिथि – चतुर्थी सुबह 10:36 तक तत्पश्चात पंचमी

 नक्षत्र – भरणी सुबह 11:33 तक तत्पश्चात कृत्तिका

 योग – हर्षण दोपहर 02:51 तक तत्पश्चात वज्र

 राहुकाल – सुबह 09:29 से सुबह 11:00 तक

 सूर्योदय – 06:29

 सूर्यास्त – 18:30

 दिशाशूल – पूर्व दिशा में

 व्रत पर्व विवरण – पंचमी का श्राद्ध

 विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

पितरों का उद्धार

भगवान शिव अपने पुत्र से कहते हैं: कार्तिकेय! संसार में विशेषतः कलियुग में वे ही मनुष्य धन्य हैं, जो सदा पितरों के उद्धार के लिये श्रीहरि का सेवन करते हैं । बेटा ! बहुत से पिण्ड देने और गया में श्राद्ध आदि करने की क्या आवश्यकता है। वे मनुष्य तो हरिभजन के ही प्रभाव से पितरों का नरक से उद्धार कर देते हैं। यदि पितरों के उद्देश्य से दूध आदि के द्वारा भगवान विष्णु को स्नान कराया जाय तो वे पितर स्वर्ग में पहुँचकर कोटि कल्पों तक देवताओं के साथ निवास करते हैं। – पद्मपुराण*

श्राद्ध में भोजन कराने का विधान

➡ भोजन के लिए उपस्थित अन्न अत्यंत मधुर, भोजनकर्त्ता की इच्छा के अनुसार तथा अच्छी प्रकार सिद्ध किया हुआ होना चाहिए। पात्रों में भोजन रखकर श्राद्धकर्त्ता को अत्यंत सुंदर एवं मधुरवाणी से कहना चाहिए किः ‘हे महानुभावो ! अब आप लोग अपनी इच्छा के अनुसार भोजन करें।

➡ फिर क्रोध तथा उतावलेपन को छोड़कर उन्हें भक्ति पूर्वक भोजन परोसते रहना चाहिए।

➡ ब्राह्मणों को भी दत्तचित्त और मौन होकर प्रसन्न मुख से सुखपूर्वक भोजन कराना चाहिए।

➡”लहसुन, गाजर, प्याज, करम्भ (दही मिला हुआ आटा या अन्य भोज्य पदार्थ) आदि वस्तुएँ जो रस और गन्ध से युक्त हैं  श्राद्धकर्म में निषिद्ध हैं।”(वायु पुराणः 78.12*

➡ “ब्राह्मण को चाहिए कि वह भोजन के समय कदापि आँसू न गिराये, क्रोध न करे, झूठ न बोले, पैर से अन्न को न छुए और उसे परोसते हुए न हिलाये। आँसू गिराने से श्राद्धान्न भूतों को, क्रोध करने से शत्रुओं को, झूठ बोलने से कुत्तों को, पैर छुआने से राक्षसों को और उछालने से पापियों को प्राप्त होता है।”(मनुस्मृतिः 3.229.230)

➡ “जब तक अन्न गरम रहता है और ब्राह्मण मौन होकर भोजन करते हैं, भोज्य पदार्थों के गुण नहीं बतलाते तब तक पितर भोजन करते हैं। सिर में पगड़ी बाँधकर या दक्षिण की ओर मुँह करके या खड़ाऊँ पहनकर जो भोजन किया जाता है उसे राक्षस खा जाते हैं।”(मनुस्मृतिः 3.237.238)

➡ “भोजन करते हुए ब्राह्मणों पर चाण्डाल, सुअर, मुर्गा, कुत्ता, रजस्वला स्त्री और नपुंसक की दृष्टि नहीं पड़नी चाहिए। होम, दान, ब्राह्मण-भोजन, देवकर्म और पितृकर्म को यदि ये देख लें तो वह कर्म निष्फल हो जाता है।

radhey krishna auto

ये भी पढ़े:- क्या सच में श्राद्ध के दिनों में कौओं को भोजन करवानें से मिलता है पुण्य, जानें

Tez Tarrar News

Vasundhra Tyagi

वसुंधरा त्यागी कंटेंट मार्केटिंग और राइटिंग की फील्ड में करीब 2 साल से कार्यरत हैं। वर्तमान में तेज़ तर्रार मीडिया में बतौर राइटर और एडिटर अपना रोल निभा रही हैं।… More »
Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker!