Aaj Ka Hindu Panchang: जानिए 9 नवंबर का पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

Aaj Ka Hindu Panchang: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 09 नवंबर 2021

 दिन – मंगलवार

 विक्रम संवत – 2078

 शक संवत -1943

 अयन – दक्षिणायन

 ऋतु – हेमंत

मास – कार्तिक

 पक्ष – शुक्ल

 तिथि – पंचमी सुबह 10:35 तक तत्पश्चात षष्ठी

 नक्षत्र – पूर्वाषाढा शाम 05:00 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा

 योग – धृति दोपहर 12:07 तक तत्पश्चात शूल

  राहुकाल – शाम 03:11 से शाम शाम 04:35 तक

 सूर्योदय – 06:46

 सूर्यास्त – 17:57

दिशाशूल – उत्तर दिशा में

 व्रत पर्व विवरण – लाभ पंचमी, श्री- सौभाग्य- पांडव- ज्ञान पंचमी

 विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।

 ठंडे तेल से सावधान

 बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अस्पताल में हुए शोध से यह बात सामने आयी है कि सिर में ठंडा तेल लगाने की आदत से आँखों की रोशनी जा सकती है | सिरदर्द के ३०० मरीजों पर हुए शोध में पाया गया कि ठंडा तेल दिमाग की नसों को गलाकर लोगों को अंधा बना रहा है | ये सभी पाँच सालों से ठंडा तेल लगा रहे थे | इनमें ३० प्रतिशत लोगों को मिर्गी के दौरे आने लगे हैं | बाकी लोगों का माइग्रेन तेजी से बढ़ रहा हैं!

 10 नवम्बर 2021 बुधवार को संत श्री जलाराम बापा जयंती है ।

 जलाराम बापा का जन्म सन्‌ 1799 में गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गॉंव में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रधान ठक्कर और मॉं का नाम राजबाई था। बापा की माँ एक धार्मिक महिला थी, जो साधु-सन्तों की बहुत सेवा करती थी। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर संत रघुवीर दास जी ने आशीर्वाद दिया कि उनका दुसरा प़ुत्र जलाराम ईश्वर तथा साधु-भक्ति और सेवा की मिसाल बनेगा।

 16 साल की उम्र में श्री जलाराम का विवाह वीरबाई से हुआ। परन्तु वे वैवाहिक बन्धन से दूर होकर सेवा कार्यो में लगना चाहते थे। जब श्री जलाराम ने तीर्थयात्राओं पर निकलने का निश्चय किया तो पत्नी वीरबाई ने भी बापा के कार्यो में अनुसरण करने में निश्चय दिखाया। 18 साल की उम्र में जलाराम बापा ने फतेहपूर के संत श्री भोजलराम को अपना गुरू स्वीकार किया। गुरू ने गुरूमाला और श्री राम नाम का मंत्र लेकर उन्हें सेवा कार्य में आगे बढ़ने के लिये कहा, तब जलाराम बापा ने ‘सदाव्रत’ नाम की भोजनशाला बनायी जहॉं 24 घंटे साधु-सन्त तथा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जाता था। इस जगह से कोई भी बिना भोजन किये नही जा पाता था। वे और वीरबाई मॉं दिन-रात मेहनत करते थे।

 बीस वर्ष के होते तक सरलता व भगवतप्रेम की ख्याति चारों तरफ फैल गयी। लोगों ने तरह-तरह से उनके धीरज या धैर्य, प्रेम प्रभु के प्रति अनन्य भक्ति की परीक्षा ली। जिन पर वे खरे उतरे। इससे लोगों के मन में संत जलाराम बापा के प्रति अगाध सम्मान उत्पन्न हो गया। उनके जीवन में उनके आशीर्वाद से कई चमत्कार लोगों ने देखें। जिनमे से प्रमुख बच्चों की बीमारी ठीक होना व निर्धन का सक्षमता प्राप्त कर लोगों की सेवा करना देखा गया। हिन्दु-मुसलमान सभी बापा से भोजन व आशीर्वाद पाते। एक बार तीन अरबी जवान वीरपुर में बापा के अनुरोध पर भोजन किये, भोजन के बाद जवानों को शर्मींदगी लगी, क्योंकि उन्होंने अपने बैग में मरे हुए पक्षी रखे थे। बापा के कहने पर जब उन्होंने बैग खोला, तो वे पक्षी फड़फड़ाकर उड़ गये, इतना ही नही बापा ने उन्हें आशीर्वाद देकर उनकी मनोकामना पूरी की। सेवा कार्यो के बारे में बापा कहते कि यह प्रभु की इच्छा है। यह प्रभु का कार्य है। प्रभु ने मुझे यह कार्य सौंपा है इसीलिये प्रभु देखते हैं कि हर व्यवस्था ठीक से हो सन्‌ 1934 में भयंकर अकाल के समय वीरबाई मॉं एवं बापा ने 24 घंटे लोगों को खिला-पिलाकर लोगों की सेवा की। सन्‌ 1935 में माँ ने एवं सन्‌ 1937 में बापा ने प्रार्थना करते हुए अपने नश्वर शरीर को त्याग दिया।

 आज भी जलाराम बापा की श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करने पर लोगों की समस्त इच्छायें पूर्ण हो जाती है। उनके अनुभव ‘पर्चा’ नाम से जलाराम ज्योति नाम की पत्रिका में छापी जाती है। श्रद्धालुजन गुरूवार को उपवास कर अथवा अन्नदान कर बापा को पूजते हैं।

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