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Aaj Ka Panchang 12 August: वरलक्ष्मी व्रत आज, जानें शुभ-अशुभ समय और राहुकाल

Aaj Ka Panchang 12 August: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 12 अगस्त 2022

दिन – शुक्रवार

विक्रम संवत् – 2079

शक संवत् – 1944

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – वर्षा

मास – श्रावण

पक्ष – शुक्ल

तिथि – पूर्णिमा सुबह 07:05 तक तत्पश्चात प्रतिपदा

नक्षत्र – धनिष्ठा रात्रि 01:36 तक तत्पश्चात शतभिषा

योग – सौभाग्य सुबह 11:34 तक तत्पश्चात शोभन

राहु काल – सुबह 11:07 से 12:45 तक

सूर्योदय – 06:15

सूर्यास्त – 07:14

दिशा शूल – पश्चिम दिशा में

ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:47 से 05:31 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:23 से 01:07 तक

व्रत पर्व विवरण – अमरनाथ यात्रा समाप्त, वरलक्ष्मी व्रत

विशेष – पूर्णिमा के दिन तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

*प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है ।

बरकत लाने की सरल कुंजियाँ
बाजार भाव अचानक बढ़ने-घटने से, मंदी की वजह से या अन्य कारणों से कईयों का धंधा बढ़ नहीं पाता । ऐसे में आपके काम-धंधे में बरकत का खयाल रखते हुए कुछ सरल उपाय प्रस्तुत कर रहे हैं ।
१] ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने व पूजा- स्थान पर गंगाजल रखने से बरकत होती है ।
२] दुकान में बिक्री कम होती हो तो कनेर का फूल घिस के उसका ललाट पर तिलक करके दुकान पर जायें तो ग्राहकी बढ़ेगी ।
३] रोज भोजन से पूर्व गोग्रास निकालकर गाय को खिलाने से सुख-समृद्धि व मान-सम्मान की वृद्धि होती है ।* *४] ईमानदारी से व्यवहार करें । ईमानदारी से उपार्जित किया हुआ धन स्थायी रहता है ।
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अन्नपूर्णा प्रयोग

प्रति पूर्णिमा को घर के अन्न-भंडार के स्थान पर कपास तेल का दीपक जलायें । इसके प्रभाव से घर की रसोई में बहुत बरकत होती है । यह अन्नपूर्णा प्रयोग है ।

मास – अनुसार त्रिफला का अनुपान

मासों के अनुसार त्रिफला के साथ उसमें उसकी मात्रा के छठे भाग बराबर निम्नलिखित द्रव्यों को मिला के सेवन करने से उसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है ।

(१) श्रावण और भाद्रपद – सेंधा नमक
(२) आश्विन और कार्तिक – शर्करा (मिश्री या खाँड़ अर्थात् अपरिष्कृत शक्कर)
(३) मार्गशीर्ष और पौष – सोंठ चूर्ण
(४) माघ तथा फाल्गुन – पीपर का चूर्ण
(५) चैत्र और वैशाख – शहद
(६) ज्येष्ठ तथा आषाढ़ – पुराना गुड़

इस प्रकार त्रिफला शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने में सहायक व प्रसादरूप है ।
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