धर्म

Aaj Ka Panchang 17 August: आज है घी संक्रांति, जानें नक्षत्र और राहुकाल

Aaj Ka Panchang 17 August: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 17 अगस्त 2022

दिन – बुधवार

विक्रम संवत् – 2079

शक संवत् – 1944

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – वर्षा

मास – भाद्रपद (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार श्रावण)

पक्ष – कृष्ण

तिथि – षष्ठी रात्रि 08:24 तक तत्पश्चात सप्तमी

नक्षत्र – अश्विनी रात्रि 09:57 तक तत्पश्चात भरणी

योग – गण्ड रात्रि 08:57 तक तत्पश्चात वृद्धि

राहु काल – दोपहर 12:44 से 02:20 तक

सूर्योदय – 06:17

सूर्यास्त – 07:10

दिशा शूल – उत्तर दिशा में

ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:48 से 05:32 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:22 से 01:06 तक

व्रत पर्व विवरण – विष्णुपदी संक्रांति / सिंह संक्रांति

विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

विष्णुपदी संक्रांति 17 अगस्त 2022

पुण्यकाल : सुर्योदय 07:24 से दोपहर 01:48 तक

विष्णुपदी संक्रांति में किये गये जप-ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है । (पद्म पुराण)

 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : 19 अगस्त 2022

 जन्माष्टमी व्रत की महिमा

ब्रह्माजी सरस्वती को कहते हैं और भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्त उद्धव को कहते हैं कि ʹʹजो जन्माष्टमी का व्रत रखता है, उसे करोड़ों एकादशी व्रत करने का पुण्य प्राप्त होता है और उसके रोग, शोक, दूर हो जाते हैं ।”

धर्मराज सावित्रीदेवी को कहते हैं कि “जन्माष्टमी का व्रत सौ जन्मों के पापों से मुक्ति दिलानेवाला है ।”

अकाल मृत्यु व गर्भपात से करे रक्षा

ʹभविष्य पुराणʹ में लिखा है कि ‘जन्माष्टमी’ का व्रत अकाल मृत्यु नहीं होने देता है । जो जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, उनके घर में गर्भपात नहीं होता । बच्चा ठीक से पेट में रह सकता है और ठीक समय पर बालक का जन्म होता है ।ʹ

 ऋषि प्रसाद, अगस्त 2013

धर्मराज सावित्री देवी को कहते हैं किः “जन्माष्टमी का व्रत सौ जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने वाला है ।”

ʹभविष्य पुराणʹ में लिखा है कि ‘जन्माष्टमी’ का व्रत अकाल मृत्यु नहीं होने देता है । जो जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, उनके घर में गर्भपात नहीं होता । बच्चा ठीक से पेट में रह सकता है और ठीक समय पर बालक का जन्म होता है ।ʹ

 ऋषि प्रसाद, अगस्त 2013

अत्यंत महत्वपूर्ण एवं जीवन पर्यंत अमलकारक लाभदायक बातें

वर्षा ऋतु में सूर्य का मघा नक्षत्र में भ्रमण बहुत ही लाभदायक है । मघा नक्षत्र के बारे में कहा जाता है कि “मघा के बरसे, माता के परसे”
अर्थात, जैसे बालक का पेट माता द्वारा भोजन कराने से ही भरता है, वैसे ही मघा नक्षत्र की वर्षा ही धरती माता की प्यास बुझाती है जिससे फसल भी अच्छी होती है ।

मघा नक्षत्र में वर्षा हो तो उस वर्षा का जल गुणों में ‘सोने’ के समान व पवित्रता में ‘गंगाजल’ के समान माना जाता है ।

इस जल को किसी बर्तन में भर कर पूरे वर्ष रखे जाने पर भी यह किसी प्रकार से खराब नहीं होता, इसमें कीड़े नही पड़ते ।

इस जल का उपयोग किसलिए किया जा सकता है ?

परमात्मा के दिव्य-अभिषेक के लिए उत्तम जल ।

आँखों के किसी भी रोग में दो-दो बूंद आँखों में डाल सकते हैं ।

किसी भी प्रकार के पेट दर्द में इस जल का सेवन बहुत फायदेमंद है ।

यह जल बच्चों को पिलाने से, उनके पेट में कृमि हो तो निकल जाती है ।

यदि आप कोई आयुर्वेदिक दवा ले रहे हैं तो इस जल के साथ लेने से उसके लाभ बढ़ जाते हैं ।

इस जल में भोजन बनाना भी बहुत स्वादवर्धक और स्वास्थकारक है ।

महत्वपूर्ण सूचना :- इस वर्ष सूर्य की कक्षा मघा नक्षत्र में 18/08/2022 प्रात: 03:21 से 30/08/2022 प्रातः 03:16 बजे तक रहेगी ।

इन 13 दिनों में जब भी बारिश हो, जितना हो सके बारिश का पानी इकट्ठा कर लें । इन 13 दिनों में खुले मैदान में ताँबा, पीतल, काँसा या स्टील के पात्र इस प्रकार रखें कि वर्षा का जल सीधे आपके द्वारा रखे गए पात्रों में भर जाए ।
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