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Aaj ka Panchang 24 December: आज से शुरू होगा पौष मास का शुक्ल पक्ष, चंद्रमा बदलेगा राशि

Aaj ka Panchang 24 December: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 24 दिसम्बर 2022

दिन – शनिवार

विक्रम संवत् – 2079

शक संवत् – 1944

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – शिशिर

मास – पौष

पक्ष – शुक्ल

तिथि – प्रतिपदा दोपहर 12:06 तक तत्पश्चात द्वितीया

नक्षत्र – पूर्वाषाढ़ा रात्रि 01:13 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा

योग – वृद्धि सुबह 09:27 तक तत्पश्चात व्याघात

राहु काल – सुबह 09:58 से 11:19 तक

सूर्योदय – 07:18

सूर्यास्त – 06:01

दिशा शूल – पूर्व दिशा में

ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:31 से 06:24 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:13 से 01:06 तक

व्रत पर्व विवरण – चन्द्र दर्शन ( शाम 06:08 से 07:52)

विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है ।
द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है ।
(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

तुलसी के औषधीय गुण (भाग-१)

  • जहाँ तुलसी के पौधे अत्यधिक मात्रा में होते हैं वहाँ की हवा शुद्ध व पवित्र रहती है । तुलसी के पत्तों में एक विशेष प्रकार का द्रव्य होता है जो कीटाणुयुक्त वायु को शुद्ध करता है ।*
  • वैज्ञानिक मतानुसार तुलसी में विद्युत-शक्ति अधिक होती है जो कि ग्रहण के समय सूर्य से निकलने वाली हानिकारक किरणों का प्रभाव खाद्य पदार्थों पर नहीं होने देती । अतः सूर्य-चन्द्र ग्रहण के समय खाद्य पदार्थों पर तुलसी की पत्तियाँ रखने की परम्परा है ।*
  • तुलसी के पास बैठकर प्राणायाम करने से कीटाणुओं का नाश होकर शरीर में बल, बुद्धि व ओज की वृद्धि होती है ।*
  • प्रातः खाली पेट तुलसी के 8-10 पत्ते खाकर ऊपर से एक गिलास पानी पीकर टहलने से बल, तेज, स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है व जलंदर भगंदर, कैंसर जैसी बीमारियाँ पास भी नहीं फटकती हैं ।*
  • तुलसी में एक विशिष्ट क्षार होता है। तुलसी का स्पर्श व दर्शन भी लाभदायी है । यह शरीर की विद्युत को बनाये रखती है । तुलसी की माला धारण करने वाले को बहुत-से रोगों से मुक्ति मिलती है ।*
  • तुलसीदल में एक उत्कृष्ट रसायन है । वह गर्म और त्रिदोषनाशक है । रक्तिविकार, ज्वर, वायु, खांसी, कृमि निवारक है तथा हृदय के लिए हितकारी है ।*
  • सफेद तुलसी के सेवन से त्वचा व हड्डियों के रोग दूर होते हैं । काली तुलसी के सेवन से सफेद दाग दूर होते हैं । तुलसी की चाय पीने से ज्वर, आलस्य, सुस्ती तथा वात-पित्त विकार दूर होते हैं व भूख खुलकर लगती है । तुलसी की चाय में तुलसीदल, सौंफ, इलायची, पुदीना, सौंठ, कालीमिर्च, ब्राह्मी, दालचीनी आदि का समावेश किया जा सकता है ।*
    तुलसी सौन्दर्यवर्धक व रक्तशोधक है । सुबह शाम तुलसी व नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर घिसने से काले दाग दूर होते हैं व सुन्दरता बढ़ती है ।*
  • ज्वर, खांसी, श्वास के रोग में तुलसी का रस 3 ग्राम, अदरक का रस 3 ग्राम व एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से फायदा होता है ।*
  • तुलसी के रस से जठराग्नि प्रदीप्त होती है । तुलसी का रस कृमिनाशक है । तुलसी के रस में नमक डालकर नाक में बूँदे डालने से मूर्छा हटती है, हिचकी रूकती है । यह किडनी की कार्यशक्ति को बढ़ाती है । रक्त में स्थित कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करती है । सेवन से एसिडिटी, स्नायुओं का दर्द, सर्दी-जुकाम, मेदवृद्धि, मासिक सम्बंधी रोग, बच्चों के रोग, विशेषकर सर्दी, कफ, दस्त, उल्टी आदि में लाभ करती हैं । तुलसी हृदयरोग में आश्चर्यजनक लाभ करती है ।*
  • तुलसी की सूखी पत्तियों को अच्छी तरह पीसकर उसका गाढ़ा लेप चेहरे पर लगाने से त्वचा के छिद्र खुल जाते हैं । पसीने के साथ अशुद्धि निकल जाने से त्वचा स्वच्छ, दुर्गन्धरहित, तेजस्वी व मुलायम बनती है । चेहरे की कान्ति बढ़ती है ।*

सावधानी : तुलसी निषेध

उष्ण प्रकृति वाले, रक्तस्राव व दाहवाले व्यक्तियों को ग्रीष्म व शरद ऋतु में तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए । तुलसी के सेवन के डेढ़-दो घंटे तक दूध नहीं लेना चाहिए । अर्श-मस्से के रोगियों को तुलसी व काली मिर्च का उपयोग एक साथ नहीं करना चाहिए क्योंकि इनकी तासीर गर्म होती है

 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग

शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)

हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*

आर्थिक कष्ट निवारण हेतु

एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।
Accherishtey
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