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Aaj Ka Panchang 24 June: जानिए कब से कब तक है एकादशी तिथि

Aaj Ka Panchang 24 June: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक 24 जून 2022

दिन – शुक्रवार

विक्रम संवत – 2079

शक संवत – 1944

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – वर्षा

मास – आषाढ़ ( गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार ज्येष्ठ )

पक्ष – कृष्ण

तिथि – एकादशी रात्रि 11:12 तक तत्पश्चात द्वादशी

नक्षत्र – अश्विनी सुबह 08:04 तक तत्पश्चात भरणी

योग – सुकर्मा 25 जून प्रातः 05:14 तक तत्पश्चात धृति

राहु काल – सुबह 11:00 से दोपहर 12:42 तक

सूर्योदय – 05:56

सूर्यास्त – 07:29

दिशा शूल – पश्चिम दिशा में

ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04:32 से 05:14 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:21 से 01:03 तक

व्रत पर्व विवरण – योगिनी एकादशी

विशेष – एकादशी को शिम्बी(सेम), चावल खाना वर्जित है ।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

योगिनी एकादशी 24 जून 2022

योगिनी एकादशी 23 जून रात्रि 09:42 से 24 जून रात्रि 11:12 तक है । एकादशी व्रत उपवास 24 जून शुक्रवार को रखें ।

एकदाशी में क्या करें, क्या ना करें ?

1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।

2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें ।

हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l

राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।

एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l

3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जाप करना चाहिए ।

4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।

5. एकदशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।

6. व्रत के ( दशमी, एकादशी और द्वादशी ) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – का सेवन न करें ।

7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।*

8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।

9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।

10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।

11. इस दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए ।

12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।

13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) ।

14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।

इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।

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