धर्म

Aaj Ka Panchang 26 February: आज का मुहूर्त, शुभ योग और राहुकाल का समय जानें

Aaj Ka Panchang 26 February: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 26 फरवरी 2022
दिन –  शनिवार
विक्रम संवत – 2078
शक संवत -1943
अयन – उत्तरायण
ऋतु – वसंत ऋतु
मास – फाल्गुन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार- माघ)
पक्ष – कृष्ण*
तिथि – दशमी सुबह 10:39 तक तत्पश्चात एकादशी
नक्षत्र – मूल सुबह 10:32 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा
योग – सिद्धि रात्रि 08:52 तक तत्पश्चात वयतीपात
राहुकाल – सुबह 09:57 से सुबह 11:24 तक
सूर्योदय – 07:02
सूर्यास्त – 18:40
दिशाशूल – पूर्व दिशा में
व्रत पर्व विवरण – विजया एकादशी, (स्मार्त), स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती (ति. अ.)
विशेष

एकादशी के दिन करने योग्य

26 फरवरी 2022 शनिवार को सुबह 10:40 से 27 फरवरी, रविवार को सुबह 08:12 तक एकादशी है ।
विशेष – 27 फरवरी, रविवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।
एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें  विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l

एकादशी के दिन

महीने में १५-१५ दिन में  एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो  चावल खाता है. तो एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा

त्रिस्पृशा का महायोग

त्रिस्पृशा का महायोग : हजार एकादशियों का फल देनेवाला व्रत
27 फरवरी 2022 रविवार को त्रिस्पृशा-विजया एकादशी है ।
एक ‘त्रिस्पृशा एकादशी’ के उपवास से एक हजार एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है । इस एकादशी को रात में जागरण करनेवाला भगवान विष्णु के स्वरूप में लीन हो जाता है ।
‘पद्म पुराण’ में आता है कि देवर्षि नारदजी ने भगवान शिवजी से कहा : ‘‘सर्वेश्वर ! आप त्रिस्पृशा नामक व्रत का वर्णन कीजिये, जिसे सुनकर लोग कर्मबंधन से मुक्त हो जाते हैं ।”
महादेवजी : ‘‘विद्वान् ! देवाधिदेव भगवान ने मोक्षप्राप्ति के लिए इस व्रत की सृष्टि की है, इसीलिए इसे ‘वैष्णवी तिथि कहते हैं । भगवान माधव ने गंगाजी के पापमुक्ति के बारे में पूछने पर बताया था : ‘‘जब एक ही दिन एकादशी, द्वादशी तथा रात्रि के अंतिम प्रहर में त्रयोदशी भी हो तो उसे ‘त्रिस्पृशा’ समझना चाहिए । यह तिथि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देनेवाली तथा सौ करोड तीर्थों से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है । इस दिन भगवान के साथ सदगुरु की पूजा करनी चाहिए ।”
यह व्रत सम्पूर्ण पाप-राशियों का शमन करनेवाला, महान दुःखों का विनाशक और सम्पूर्ण कामनाओं का दाता है । इस त्रिस्पृशा के उपवास से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं । हजार अश्वमेघ और सौ वाजपेय यज्ञों का फल मिलता है । यह व्रत करनेवाला पुरुष पितृ कुल, मातृ कुल तथा पत्नी कुल के सहित विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है । इस दिन द्वादशाक्षर मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करना चाहिए । जिसने इसका व्रत कर लिया उसने सम्पूर्ण व्रतों का अनुष्ठान कर लिया ।

Hair Crown

 

यह भी पढ़े: New Year 2022: नए साल से पहले रखें अपने पर्स में ये ख़ास चीज, नहीं होगी पैसों की कमी

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button