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Aaj Ka Panchang 26 September: शारदीय नवरात्रि आज से प्रारंभ, जानें समय और रा​हुकाल

Aaj Ka Panchang 26 September: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 26 सितम्बर 2022

दिन – सोमवार

विक्रम संवत् – 2079

शक संवत् – 1944

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – शरद

मास – आश्विन

पक्ष – शुक्ल

तिथि – प्रतिपदा 27 सितम्बर प्रातः 03:08 तक तत्पश्चात द्वितीया

नक्षत्र – हस्त 27 सितम्बर सुबह 06:16 तक तत्पश्चात चित्रा

योग – शुक्ल सुबह 08:06 तक तत्पश्चात ब्रह्म

राहु काल – सुबह 08:00 से 09:30 तक

सूर्योदय – 06:29

सूर्यास्त – 06:32

दिशा शूल – पूर्व दिशा में

ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:54 से 05:42 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:07 से 12:55 तक

व्रत पर्व विवरण – शारदीय नवरात्र प्रारम्भ

विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

नवरात्रि : 26 सितम्बर से 04 अक्टूबर 2022

नवरात्र – व्रत पापनाशक है । इसमें उपवास करके देवी भगवती की पूजा, जप व होम करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है । धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष – इन चारों की अभिलाषा करनेवाले को यह उत्तम व्रत अवश्य करना चाहिए ।

नवरात्रि के दिनों का अर्थ

नवरात्रि के प्रथम तीन दिन होते हैं माँ काली की उपासना के होते हैं… जिसमे अपने काले कर्मो की निवृति के लिए जप किया जाता है ।

नवरात्रि के दूसरे ३ दिन लक्ष्मी की उपासना के होते है… ताकि हम सफल सम्पदा के अधिकारी बनें ।

आखिरी ३ दिन सरस्वती की उपासना के होते हैं… ताकि हमारे जीवन में प्रज्ञा ज्ञान का अर्जन हो । उसके लिए सारस्वत्य मंत्र का जप और सूर्य नारायण का ध्यान करना चाहिये ।

देवी भागवत के तीसरे स्कन्द में नवरात्रि का महत्त्व वर्णन किया है । मनोवांछित सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए देवी की महिमा सुनायी है, नवरात्रि के 9 दिन उपवास करने के शारीरिक लाभ बताये हैं ।

1. शरीर में आरोग्य के कण बढ़ते हैं ।

2. जो उपवास नहीं करता तो रोगों का शिकार हो जाता है, जो नवरात्रि के उपवास करता है, तो भगवान की आराधना होती है, पुण्य तो बढ़ता ही है, लेकिन शरीर का स्वास्थ्य भी वर्ष भर अच्छा रहता है ।

3. प्रसन्नता बढ़ती है ।

4. द्रव्य की वृद्धि होती है ।

5. लंघन और विश्रांति से रोगी के शरीर से रोग के कण खत्म होते हैं ।

नवरात्रि में जप से श्रेष्ठ लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं । और वह जप का मंत्र बताया गया हैं । इस मंत्र से लक्ष्मी जी महालक्ष्मी होकर भोग और मोक्ष देनेवाली बनती हैं ।

“ॐ श्रीं ह्रीं क्लिं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा ”
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