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Aaj Ka Panchang 30 August: हरतालिका तीज पर लग रहा है बेहद शुभ नक्षत्र

Aaj Ka Panchang 30 August: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 30 अगस्त 2022
दिन – मंगलवार
विक्रम संवत् – 2079
शक संवत् – 1944
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास – भाद्रपद
पक्ष – शुक्ल
तिथि – तृतीया अपरान्ह 03:33 तक तत्पश्चात चतुर्थी
नक्षत्र – हस्त रात्रि 11:50 तक तत्पश्चात चित्रा
योग – शुभ रात्रि 12:05 तक तत्पश्चात शुक्ल
राहु काल – सुबह 07:56 से 09:31 तक
सूर्योदय – 06:21
सूर्यास्त – 07:00
दिशा शूल – पूर्व दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:50 से 05:36 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:18 से 01:03 तक
व्रत पर्व विवरण – हरितालिका तीज, मंगलवारी चतुर्थी, वराह जयंती
 विशेष – तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है । चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
मंगलवारी चतुर्थी – 30 अगस्त 2022
पुण्यकाल : 30 अगस्त दोपहर 03:34 से 31 अगस्त सूर्योदय तक
जैसे सूर्य ग्रहण को दस लाख गुना फल होता है, वैसे ही मंगलवारी चतुर्थी को होता है । बहुत मुश्किल से ऐसा योग आता है । मत्स्य पुराण, नारद पुराण आदि शास्त्र में इसकी भारी महिमा है ।*
इस दिन अगर कोई जप, दान, ध्यान, संयम करता है तो वह दस लाख गुना प्रभावशाली होता है, ऐसा वेदव्यास जी ने कहा है ।

आवश्यक अमीनो एसिड्स का उत्कृष्ट स्रोत

मनुष्य-शरीर के लिए ९ अमीनो एसिड्स अत्यंत आवश्यक हैं जिनको हमें आहार से ही प्राप्त करना अनिवार्य होता है । इनकी कमी से प्रोटीन के निर्माण में बाधा उत्पन्न होती है और प्रोटीन के महत्त्वपूर्ण कार्य जैसे कि अंतःस्राव एवं न्यूरोट्रांसमीटर का निर्माण, मांसपेशियों का विकास एवं अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य न होने के कारण विभिन्न समस्याएँ उत्पन्न होती हैं ।
मींगी में ९ में से ८ अमीनो एसिड्स पाये जाते हैं । 100 ग्राम मींगी में दैनिक जरूरत से लगभग १.५ से २ गुना ज्यादा मात्रा में अमीनो एसिड्स पाये जाते हैं, साथ ही कैल्शियम, मैग्नेशियम, लौह तत्व, मैंगनीज, फॉस्फोरस आदि खनिज एवं विटामिन ‘ई’, ‘सी’, ‘के’ आदि विटामिन भी पाये जाते हैं । गुठली की मींगी में पाये जानेवाले मेंगीफेरिन नाम के घटक के कारण यह मधुमेह, मोटापा एवं विभिन्न प्रकार के कैंसर से सुरक्षा में सहायक है ।
आयुर्वेद के अनुसार गुठली की मींगी कफ-पित्तशामक एवं कृमिनाशक है । यह छाती की जलन, उलटी, जी मिचलाना, दस्त, गर्भाशय की सूजन, बहुमूत्रता, अधिक मासिक स्राव, श्वेत प्रदर आदि रोगों में लाभदायी है ।

कैसे करें सेवन 

वैसे तो कच्ची मींगी बहुत ही अच्छा पोषक आहार है परंतु थोड़ी कड़वी और रुचिकर न होने से उसका पाचन भी अच्छे-से नहीं हो पायेगा, साथ ही यह पाचन संबंधी समस्याएँ भी कर सकती है । अतः गुठली को भूनें और फिर मींगी निकाल के सेवन करें या मींगी को सेंककर अथवा उबाल के खायें, इससे यह सुपाच्य हो जाती है ।
कच्ची मींगी के आटे को गेहूँ, जौ, मक्का आदि के आटे में 10-20 प्रतिशत प्रमाण में मिलाकर रोटी, शीरा आदि बनाकर सेवन कर सकते हैं ।
दाल, सब्जी आदि पकाते समय कच्ची भींगी के टुकड़े डाल के पकाकर भी सेवन कर सकते हैं ।
दस्त में कच्ची मींगी के २ से ३ ग्राम चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करें

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