धर्म

Aaj Ka Panchang 9 August: कोई भी कार्य करने से पहले जानें पंचांग

Aaj Ka Panchang 9 August: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 09 अगस्त 2022*

*दिन – मंगलवार*

*विक्रम संवत् – 2079*

*शक संवत् – 1944*

*अयन – दक्षिणायन*

*ऋतु – वर्षा*

*मास – श्रावण*

*पक्ष – शुक्ल*

*तिथि – द्वादशी शाम 05:45 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*

*नक्षत्र – मूल दोपहर 12:18 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा*

*योग – विष्कुम्भ रात्रि 11:36 तक तत्पश्चात प्रीति*

*राहु काल – शाम 04:01 से 05:39 तक*

*सूर्योदय – 06:14*

*सूर्यास्त – 07:16*

*दिशा शूल – उत्तर दिशा में*

*ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:46 से 05:30 तक*

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:23 से 01:07 तक*

*व्रत पर्व विवरण – भौम प्रदोष व्रत*

*विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

भौम प्रदोष व्रत (09 अगस्त 2022) : कर्ज-निवारक कुँजी

*प्रदोष व्रत यदि मंगलवार का दिन पड़े तो उसे ‘भौम प्रदोष व्रत’ कहते हैं । मंगलदेव ऋणहर्ता होने से कर्ज-निवारण के लिए यह व्रत विशेष फलदायी है । भौम प्रदोष व्रत के दिन संध्या के समय यदि भगवान शिव एवं सद्गुरुदेव का पूजन करें तो उनकी कृपा से जल्दी कर्ज से मुक्त हो जाते हैं । पूजा करते समय यह मंत्र बोले :*

*मृत्युंजय महादेव त्राहि मां शरणागतम् ।*

*जन्ममृत्युजराव्याधिपीडितं कर्मबन्धनै: ॥*

*इस दैवी सहायता के साथ स्वयं भी थोड़ा पुरुषार्थ करें ।*

*📖 ऋषि प्रसाद – मई २०२० से*

*गीर गायों का स्वर्णक्षारयुक्त बिलोना शुद्ध देशी घी*

*वर्तमान में देशी गाय का विश्वसनीय शुद्ध घी प्राप्त करना कठिन है । उसमें भी शुद्ध जल-वायु एवं जैविक खेती द्वारा उगाये गये उत्तम आहार द्रव्यों का सेवन करनेवाली तथा प्रदूषणरहित प्राकृतिक वातावरण में रहनेवाली देशी गीर गायों का घी प्राप्त होना तो दुर्लभ ही है । परंतु पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की लोकहितकारी विभिन्न सेवाओं में से एक गौ पालन एवं संवर्धन के कारण यह धरती का दुर्लभ अमृत समाज को उपलब्ध हो रहा है ।*

*पूज्य बापूजी की चरणरज से पावन हुई श्योपुर आश्रम की भूमि पर रहनेवाली उत्तम गीर नस्ल की ये गायें आश्रम की जैविक खेती के माध्यम से भक्तों द्वारा गौ-खाद से उगाये गये चारे से पुष्ट होती हैं । आश्रम के पावन वातावरण में रहनेवाली इन पवित्र गौ-माताओं से प्राप्त दूध से पारम्परिक पद्धति से बनाया गया बिलोना घी केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं अपितु मानसिक बौद्धिक व आध्यात्मिक उन्नतिकारक भी है । इस घी की सात्त्विकता, गुणवत्ता व लाभों का पूरा वर्णन नहीं किया जा सकता ।*

देशी गोघृत-सेवन के लाभ :*

*(१) हृदय स्वस्थ व बलवान होता है । रक्तदाब नियंत्रित रहता है । हृदय की रक्तवाहिनियों की धमनी प्रतिचय (atherosclerosis) से रक्षा करता है । अतः हृदयरोग से रक्षा हेतु तथा हृदय रोगियों के लिए यह घी अत्यंत लाभदायी है ।*

*(२) इससे ओज की वृद्धि व दीर्घायुष्य की प्राप्ति होती है ।*

*(३) मस्तिष्क की कोशिकाएँ (neurons) पुष्ट हो जाती हैं, जिससे बुद्धि व इन्द्रियों की कार्यक्षमता विकसित होती है । बुद्धि, धारणाशक्ति एवं स्मृति की वृद्धि होती है ।*

*(४) मन का सत्व गुण विकसित होकर चिंता, तनाव, चिड़चिड़ापन, क्रोध आदि दूर होने में मदद मिलती है । मन की एकाग्रता बढ़ती है । साधना में उन्नति होती है ।*

*(५) नेत्रज्योति बढ़ती है । चश्मा, मोतियाबिंद (cataract), काँचबिंदु (glaucoma) व आँखों की अन्य समस्याओं से रक्षा होती है ।*

*(६) हड्डियाँ व स्नायु सशक्त होते हैं । संधिस्थान (joints) लचीले व मजबूत बनते हैं ।*

*(७) कैंसर से लड़ने व उसकी रोकथाम की आश्चर्यजनक क्षमता प्राप्त होती है ।*

*(८) रोगप्रतिरोधक शक्ति (immunity power) बढ़कर घातक विषाणुजन्य संक्रमणों (viral infections) से प्रतिकार करने की शक्ति मिलती है ।*

*(९) जठराग्नि तीव्र व पाचन-संस्थान सशक्त होता है । मोटापा नहीं आता, वजन नियंत्रित रहता है । वीर्य पुष्ट होता है । यौवन दीर्घकाल तक बना रहता है ।*

*(१०) चेहरे की सौम्यता, तेज एवं सुंदरता बढ़ती है । स्वर उत्तम होता है एवं रंग निखरता है । बाल घने, मुलायम व लम्बे होते हैं ।

*(११) गर्भवती माँ द्वारा सेवन करने पर गर्भस्थ शिशु बलवान, पुष्ट और बुद्धिमान बनता है ।
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