धर्म

Aaj Ka Panchang Hindu 9 March: आज का मुहूर्त, शुभ योग और राहुकाल का समय जानें

Aaj Ka Panchang Hindu 9 March: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक 09 मार्च 2022

दिन – बुधवार

विक्रम संवत – 2078

शक संवत – 1943*l

अयन – उत्तरायण

ऋतु – वसंत

मास – फाल्गुन

पक्ष – शुक्ल

तिथि – सप्तमी 2:56 ए. एम मार्च 10 तक तत्पश्चात अष्टमी

नक्षत्र – कृत्तिका 8:31ए. एम तक तपश्चात रोहिणी

योग – विष्कम्भ 1:16 ए. एम मार्च 10 तत्पश्चात प्रीती

राहुकाल -12:50 पी.एम से 2:19 पी.एम तक

सूर्योदय – 06:54

सूर्यास्त – 18:46

चन्द्रोदय – 11:06 ए.एम.

चन्द्रोस्त – 12:55 ए.एम मार्च 10

दिशाशूल – उत्तर दिशा में

विजय मुहूर्त – 2:49 पी.एम. से 3:36 पी.एम

गोधूलि मुहूर्त – 6:34 पी.एम से 6:58 पी.एम
सायह्न सन्ध्या – 6:46 पी.एम से 7:59 पी.एम

दिन के चौघड़िया

6:54 से 8:23 लाभ – उन्नति
8:23 से 9:52 अमृत- सर्वोत्तम
9:52 से 11:21 काल – हानि
11:21 से 12:50 शुभ
12:50 से 2:19 रोग- अमंगल
2:19 से 3:48 उद्वेग-अशुभ
3:48 से 5:17 चर – सामान्य
5:17 से 6:46 लाभ – उन्नति

रात के चौघड़िया

6:46 से 8:17 उद्वेग-अशुभ
8:17 से 9:48 शुभ – उत्तम
9:48 से 11:19 अमृत- सर्वोत्तम
11:19 से 12:50 चर – सामान्य

12:50 से 2:21 रोग- अमंगल

2:21 से 3:52 काल – हानि
3:52 से 5:23 लाभ – उन्नति
5:23 से 6:53 उद्वेग-अशुभ

व्रत पर्व विवरण – होलाष्टक प्रारंभ
विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

होलाष्टक विशेष

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर फाल्गुन मास की पूर्णिमा यानी होली के दिन तक का काल “होलाष्टक” कहलाता है | इन दिनों में शादी, ब्याह, सगाई आदि के काम नहीं किये जाते, लेकिन अगर जप-तप करते हैं तो बहुत फायदा होता है | चमत्कारिक फायदा होता है |

कालसर्प योग से मुक्ति पाने

कालसर्प दोष बहुत भयंकर माना जाता है | और ये करो… ये करो… इतना खर्चा करो…..इतना जप करो…. कई लोग इनको ठग लेते हैं | फिर भी कालसर्प योग से उनका पीछा नहीं छूटता | लेकिन ज्योतिष के अनुसार उनका कालसर्प योग नहीं रहता जिनके ऊपर केसुड़े (पलाश ) के रंग – होली के रंग का फुवारा लग जाता है | फिर कालसर्प योग से मुक्ति हो गई | कालसर्प योग के भय से पैसा खर्चना नहीं है और अपने को ग्रह दोष है, कालसर्प है ऐसा मानकर डरना नहीं अपने को दुखी करना नहीं है |

ब्रम्हवृक्ष पलाश

पलाश को हिंदी में ढ़ाक, टेसू, बंगाली में पलाश, मराठी में पळस, गुजराती में केसुडा कहते है | इसके पत्त्तों से बनी पत्तलों पर भोजन करने से चाँदी – पात्र में किये भोजन तुल्य लाभ मिलते हैं |

लिंग पुराण’ में आता है कि पलाश की समिधा से ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र द्वारा १० हजार आहुतियाँ दें तो सभी रोगों का शमन होता है |

पलाश के फूल : प्रेमह (मुत्रसंबंधी विकारों) में: पलाश-पुष्प का काढ़ा (५० मि.ली.) मिश्री मिलाकर पिलायें |

रतौंधी की प्रारम्भिक अवस्था में : फूलों का रस आँखों में डालने से लाभ होता है | आँखे आने पर (Conjunctivitis) फूलों के रस में शुद्ध शहद मिलाकर आँखों में आँजे |

वीर्यवान बालक की प्राप्ति : एक पलाश-पुष्प पीसकर, उसे दूध में मिला के गर्भवती माता को रोज पिलाने से बल-वीर्यवान संतान की प्राप्ति होती है |

पलाश के बीज : ३ से ६ ग्राम बीज-चूर्ण सुबह दूध के साथ तीन दिन तक दें | चौथे दिन सुबह १० से १५ मि.ली. अरंडी का तेल गर्म दूध में मिलाकर पिलाने से कृमि निकल जायेंगे |

पत्ते : पलाश व बेल के सूखे पत्ते, गाय का घी व मिश्री समभाग मिला के धूप करने से बुद्धि की शुद्धि व वृद्धि होती है |

बवासीर में : पलाश के पत्तों की सब्जी घी व तेल में बनाकर दही के साथ खायें |

छाल : नाक, मल-मूत्र मार्ग या योनि द्वारा रक्तस्त्राव होता हो तो छाल का काढ़ा (५० मि.ली.) बनाकर ठंडा होने पर मिश्री मिला के पिलायें |

पलाश का गोंद : पलाश का १ से ३ ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध या आँवला रस के साथ लेने से बल-वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं | यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है |

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