धर्म

आखिर शादी में क्यों निभाया जाता है माटी कोड़ने की परंपरा…जाने इसके पीछें की वजह

ये बात तो हम सभी जानते हैं की शादियों का मौसम चल रहा है. हर तरफ शहनाई बज रही है. सनातन धर्म में शादी विवाह को बहुत बड़ा यज्ञ के रूप में माना जाता है.

ये बात तो हम सभी जानते हैं की शादियों का मौसम चल रहा है. हर तरफ शहनाई बज रही है. सनातन धर्म में शादी विवाह को बहुत बड़ा यज्ञ के रूप में माना जाता है. कार्तिक पूर्णिमा के बाद से शादियों का शुभ मुहूर्त शुरू हो गया है. हर साल की तरह इस साल भी कुवारे लोगो की शादियों की शहनाई बज रही है .आपको बता दे की शादी विवाह के अवसर पर बहुत तरह की रस्म को निभाया जाता है. जिनके समाज में  समुदाय में जिस रस्म को माना जाता है. उस रस्म के साथ शादियों की शुरुवात होती है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार बहुत सारे रस्मो में से रस्म होती है  मिट्टी कोड़ने की ये रस्म यूपी, बिहार के लोगों  में ज्यादा देखने को मिलता है. हालांकि माटी कोड़ने का रस्म अब  लगभग हर लोग शादी के रस्म में शामिल करते हैं. शादी की शुरुआत माटी कोड़ने से होती है से ही होती है इसे मटकोड़वा भी कहा जाता है.इस रस्म के बिना शादी अधूरी रहती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की ये माटी कोड़ने की रस्म होती है ये क्या होती है इसकी शुरुआत कहां से हुई है. आखिर एक मिट्टी से किसी की शादी का क्या संबंध है.

तो आपको बता दे की मान्यता है की देवी देवताओं का वास मिट्टी में ही होता है मिट्टी में ही भगवान वास करते हैं इसी कारण से मिट्टी को कोड़ा जाता है और उसे मिट्टी को शादी के घर पर ले जाया जाता है और जिस स्थान पर शादी होती है उस स्थान पर उस मिट्टी का उपयोग किया जाता है. मिट्टी को एक शुभ संकेत माना जाता है कहा जाता है की मिट्टी में भगवान  हैं और उसे मिट्टी को शादी विवाह की घर में रखने से शुभ कार्य होते हैं.मिट्टी कोड़ने के समय औरतें गीत – गाती है शहनाइयां बजती है.

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