धर्म

दिन-रात मेहनत कर ये मुस्लिम परिवार पीढ़ियों से बना रहा रामलीला झाकी और रावण के पुतले

बुराई और घमंड का प्रतीक रावण के किरदार के बगैर दशहरे की कल्पना करना बेमानी है. लेकिन मथुरा का एक मुस्लिम परिवार ऐसा है जो पीढ़ियों से रावण बनाने का कार्य करते आ रहे है

बुराई और घमंड का प्रतीक रावण के किरदार के बगैर दशहरे की कल्पना करना बेमानी है. लेकिन मथुरा का एक मुस्लिम परिवार ऐसा है जो पीढ़ियों से रावण बनाने का कार्य करते आ रहे है और देशभर के अलग-अलग हिस्सों में इन्हें खासतौर पर रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनने के लिए बुलाया जाता है.

करीब 35 सला से मथुरा से राजस्थान के उदयपुर शहर आ रहे शाकिर अली ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ दशहरे के मौके पर हर साल उदयपुर आते हैं और रामलीला के लिए विशेष झाकियां तैयार करते है. वही रावण, कुंभकरण और मेघनाथ में पुतले तैयार करते हैं. इसको बनाने में रात दिन मेहनत की जाती है. पुतला जितना बड़ा होता है उतना ही अधिक समय लगता है.

शाकिर अली बताते है कि उनका परिवार पीढ़ियों से यही कार्य कर रहा है. मुस्लिम होते हुए भी वह अपना गुरु आग्रसेन भगवान को मानते है. उन्ही के द्वारा इनके परिवार ने यह गुर सिखा, आज देश के हर एक कौन-कौन में परिवार के अन्य सदस्यों को दशहरे को झाकियां बनाने के लिए बुलाया जाता है. कई साल से परिवार इसी व्यवसाय से जुड़ा है. अपने बच्चों को इस कार्य के बारे में सिखाया जा रहा है. रावण बनाने से पहले आस्था के देव के सामने बांस और औजारों की पूजा की जाती है, तब कार्य शुरू होता है. बांस और आसन की पूजा-अर्चना होती है. रावण का ढांचा तैयार होने के बाद पतंगी कागज लगाया जाता है. दशहरे के दिन करीब तीन बजे मैदान में पुतला खड़ा करने की चुनाैती होती है.

Accherishtey

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