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मां शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू हुई चैत्र नवरात्रि, जानें विधि, मंत्र और इसका महत्व

जैसा की आप सभी जानते है, देश भर में नवरात्रे का पावन पर्व शुरू हो चूका है। हर कोई माता रानी का दरबार सजा पूजा करने में लगा हुआ है।

जैसा की आप सभी जानते है, देश भर में नवरात्रे का पावन पर्व शुरू हो चूका है। हर कोई माता रानी का दरबार सजा पूजा करने में लगा हुआ है। इसी के साथ शारदीय नवरात्रि की शुरूआत आज से हो गई है। आपको बता दें, नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री का होता है। शास्त्रों के मुताबिक, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की उपासना और पूजा करने वाले सभी भक्तों को फलों की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए भक्त पूरे नौ दिनों का उपवास करते हैं। जानें मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, शुभ रंग व भोग-

मां शैलपुत्री पूजा विधि-
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। हिमालय की पुत्री होने की वजह से माता रानी को शैलपुत्री बोला गया है। मान्यताओं के मुताबिक, मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है। मां शैलपुत्री को सफेद वस्त्र पसंद हैं। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा को सफेद वस्त्र या सफेद पुष्प अर्पितकिये जाते है। इसके साथ ही उन्हें सफेद बर्फी या मिठाई का भोग लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है।

शारदीय नवरात्रि के पहले के शुभ मुहूर्त-
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 06:11 बजे से 10:23
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:57 बजे से 12:48

मां शैलपुत्री मंत्र-
ओम देवी शैलपुत्र्यै नमः ह्रीं शिवायै नम: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्.
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

मां शैलपुत्री भोग-
मां दुर्गा के शैलपुत्री रूप को गाय के घी और दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां शैलपुत्री प्रसन्न होती हैं।

माँ का शुभ रंग-
पहले दिन मां शैलपुत्री की अराधना का दिन होता है। मां शैलपुत्री का पसंदीदा रंग सफ़ेद होता है।

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