धर्म

28 साल से नहीँ किया अन्न का सेवन: फलाहारी बाबा की जाने कहानी

क्या मानव जीवन बिना भोजन के बिना पानी के रहने की सोच सकता है नहीं ना जी हां हमें अगर भोजन ना मिले तो हम बीमार पड़ जाते हैं यहाँ तक की हमें हमें भूख का एहसास होने लगता है

क्या मानव जीवन बिना भोजन के बिना पानी के रहने की सोच सकता है नहीं ना जी हां हमें अगर भोजन ना मिले तो हम बीमार पड़ जाते हैं यहाँ तक की हमें हमें भूख का एहसास होने लगता है तो हम खाना खा लेते हैं बात हुआ की हम अपने दैनिक जीवन में भोजन ग्रहण करते है. कुछ लोग तो खाने की काफी शौकीन भी होते हैं जिन्हें खाने के बिना कुछ क्षण भी भूख बर्दाश्त नहीं होता. तो कुछ लोग मांसाहारी भोजन को बढ़ावा देते हैं और खूब शौक से  खाते हैं.

लेकिन क्या आप सोच सकते हैं यदि आपको खाना ना मिले तो आप कैसे जीवित रहेंगे. हमारे दिमाग में तब एक ही चीज आता है कि यदि हमें अधिक से अधिक दिन तक भोजन ना मिले तो हमारा स्वास्थ्य बिगड़ सकता है और हमारी जान भी जा सकती है. हमें तरह-तरह की बीमारियां लग सकती है लेकिन क्या आप जानते हैं एक ऐसा इंसान है जो 28 साल से अन्नं को छुआ तक नहीं है.

जिनकी बातें सुनकर हम कलयुग में सतयुग का आवास कर रहे हैं. जी हां हमारे भारत देश में बहुत सारे ऋषि मुनिया रहे हैं जो एक से बढ़कर एक कार्य करके गए हैं लेकिन आप जानते हैं कि आज की युग में भी एक ऐसी ऋषि हैं जो 28 साल से अन्न  को त्याग दिए हैं वह सिर्फ अपने कर्मों से ही नहीं अपने भोजन से भी बहुत सावधान रहते हैं.

उन्हें लोग फलाहारी बाबा कहते हैं इनकी फलहारी वाली बातो  से उनकी कथा से काफी हैरान रह जाते है कि वह 28 साल से अन्न का दाना तक ग्रहण नहीं किया है और अब तक 93 यज्ञ करा चुके हैं. फलहारी बाबा भोजन में मात्र आलू और दूध का सेवन करते हैं उनका मानना है कि वह प्रभु की भक्ति में इस कदर लीन हो जाते हैं कि उन्हें भूख – प्यास कुछ नहीं लगती है उनका मार्ग है सिर्फ सनातन धर्म  को आगे बढ़ना और प्रभु की भक्ति में लीन होना.

Accherishtey

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