धर्म

Today panchang 18 February: जानें आज का मुहूर्त और शुभ योग का समय

Today panchang 18 February: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 18 फरवरी 2022

दिन – शुक्रवार

विक्रम संवत – 2078

शक संवत -1943

अयन – उत्तरायण

ऋतु – वसंत ऋतु प्रारंभ

मास – फाल्गुन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार- माघ)

पक्ष – कृष्ण

तिथि – द्वितीया रात्रि 10:29 तक तत्पश्चात तृतीया

नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी शाम 04:42 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी

योग – सुकर्मा शाम 06:31 तक तत्पश्चात धृति

राहुकाल – सुबह 11:26 से दोपहर 12:53 तक

सूर्योदय – 07:08

सर्यास्त – 18:36

दिशाशूल – पश्चिम दिशा में

व्रत पर्व विवरण – वसंत ऋतु प्रारंभ

विशेष – द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

वसंत ऋतु का संदेश

खान-पान का ध्यान विशेष-वसंत ऋतु का है संदेश

18 फरवरी 2022 शुक्रवार से वसंत ऋतु प्रारंभ ।

ऋतुराज वसंत शीत व उष्णता का संधिकाल है | इसमें शीत ऋतु का संचित कफ सूर्य की संतप्त किरणों से पिघलने लगता है, जिससे जठराग्नि मंद हो जाती है और सर्दी-खाँसी, उल्टी-दस्त आदि अनेक रोग उत्पन्न होने लगते हैं | अतः इस समय आहार-विहार की विशेष सावधानी रखनी चाहिए |

आहार : इस ऋतु में देर से पचनेवाले, शीतल पदार्थ, दिन में सोना, स्निग्ध अर्थात घी-तेल में बने तथा अम्ल व रसप्रधान पदार्थो का सेवन न करें क्योंकि ये सभी कफ वर्धक हैं | (अष्टांगहृदय ३.२६)

वसंत में मिठाई, सूखा मेवा, खट्टे-मीठे फल, दही, आईसक्रीम तथा गरिष्ठ भोजन का सेवन वर्जित है | इन दिनों में शीघ्र पचनेवाले, अल्प तेल व घी में बने, तीखे, कड़वे, कसैले, उष्ण पदार्थों जैसे- लाई, मुरमुरे, जौ, भुने हुए चने, पुराना गेहूँ, चना, मूँग , अदरक, सौंठ, अजवायन, हल्दी, पीपरामूल, काली मिर्च, हींग, सूरन, सहजन की फली, करेला, मेथी, ताजी मूली, तिल का तेल, शहद, गौमूत्र आदि कफनाशकपदार्थों का सेवन करें | भरपेट भोजन ना करें | नमक का कम उपयोग तथा १५ दिनों में एक कड़क उपवास स्वास्थ्य के लिए हितकारी है | उपवास के नाम पर पेट में फलाहार ठूँसना बुद्धिमानी नही है |

विहार : ऋतु-परिवर्तन से शरीर में उत्पन्न भारीपन तथा आलस्य को दूर करने के लिए सूर्योदय से पूर्व उठना, व्यायाम, दौड़, तेज चलना, आसन तथा प्राणायाम (विशेषकर सूर्यभेदी) लाभदायी है | तिल के तेल से मालिश कर सप्तधान उबटन से स्नान करना स्वास्थ्य की कुंजी है |

वसंत ऋतु के विशेष प्रयोग

  • २ से ३ ग्राम हरड चूर्ण में समभाग मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से ‘रसायन’ के लाभ प्राप्त होते हैं |
  • १५ से २० नीम के पत्ते तथा २-३ काली मिर्च १५-२० दिन चबाकर खाने से वर्षभर चर्मरोग, ज्वर, रक्तविकार आदि रोगों से रक्षा होती है |
  • अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े कर उसमें नींबू का रस और थोडा नमक मिला के सेवन करने से मंदाग्नि दूर होती है |
  • ५ ग्राम रात को भिगोयी हुई मेथी सुबह चबाकर पानी पीने से पेट की गैस दूर होती है |
  • रीठे का छिलका पानी में पीसकर २-२ बूँद नाक में टपकाने से आधासीसी (सिर) का दर्द दूर होता है |*
  • १० ग्राम घी में १५ ग्राम गुड़ मिलाकर लेने से सूखी खाँसी में राहत मिलती है |*
  • १० ग्राम शहद, २ ग्राम सोंठ व १ ग्राम काली मिर्च का चूर्ण
  • मिलाकर सुबह-शाम चाटने से बलगमी खाँसी दूर होती है |

सावधानी : मुँह में कफ आने पर उसे तुरंत बाहर निकाल दें | कफ की तकलीफ में अंग्रेजी दवाइयाँ लेने से कफ सूख जाता है, जो भविष्य में टी.बी., दमा, कैंसर जैसे गम्भीर रोग उत्पन्न कर सकता है | अतः कफ बढ़ने पर ? जकरणी जलनेति का प्रयोग करें (विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें आश्रम से प्रकाशित पुस्तक ‘योगासन’) |*

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