धर्म

आज का हिन्दू पंचांग 24 नवम्बर: गुरुवार को कब काम करेगा आपका गुडलक

आज का हिन्दू पंचांग 24 नवम्बर: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 24 नवम्बर 2022
दिन – गुरुवार
विक्रम संवत् – 2079
शक संवत् – 1944
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – हेमंत
मास – मार्गशीर्ष
पक्ष – शुक्ल
तिथि – प्रतिपदा रात्रि 01:37 तक तत्पश्चात द्वितीया
नक्षत्र – अनुराधा शाम 07:37 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा
योग – अतिगण्ड दोपहर 12:20 तक तत्पश्चात सुकर्मा
राहु काल – दोपहर 01:48 से 03:10 तक
सूर्योदय – 06:59
सूर्यास्त – 05:54
दिशा शूल – दक्षिण दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:14 से 06:07 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:00 से 12:53 तक
व्रत पर्व विवरण
विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

भगवान ने ज्वर को हराया व ज्वरनाश का उपाय बताया

 महाभारत अंर्तगत हरिवंश पुराण में एक कथा आती है : बाणासुर के साथ युद्ध के समय त्रिशिरा नामक ज्वर ने बलरामजी पर आक्रमण किया और उनके ऊपर भस्म फेंका, जिससे उनके शरीर जलन होने लगी । उसे भगवान श्री कृष्ण ने शांत किया । फिर त्रिशिरा ज्वर के साथ भगवान का भीषण युद्ध हुआ और वह उनके शरीर में घुस गया । तदनंतर भगवान ने वैष्णव ज्वर को प्रकट कर उसके द्वारा त्रिशिरा ज्वर को अपने शरीर से निकलवा दिया और उसके सौ टुकड़े कर देने का उद्यत हुए | तब त्रिशिरा ज्वर ने अपनी रक्षा हेतु भगवान से प्रार्थना की और उसी समय आकशवाणी ने भी उसका वध करने के लिए मना किया तो भगवान ने उसे छोड़ दिया ।*
 त्रिशिरा ने जब भगवान की शरण ग्रहण की तो भगवान उसे वरदान दिया तथा कहा : ” ज्वर ! जो मुझे प्रणाम कर के एकचित होकर हम दोनों के इस पराक्रम का पाठ करे, वह मनुष्य अवश्य ज्वररहित हो जाये ।”*

 ज्वर नाशक स्तुति

त्रिपाद् भस्महरणस्त्रिशिरा नवलोचन:।
स मे प्रीत: सुखं दद्यात् सर्वामयपतिर्ज्वर:।।3।।
आद्यन्तवन्त: कवय: पुराणा: सूक्ष्मा: बृहन्तो्ऽप्यनुशासितार:।
सर्वांज्वतरान् घ्नन्तु ममानिरुद्धप्रद्युम्नासंकर्षणवासुदेवा:।।37।।
 ”जिसके तीन पैर हैं, भस्म ही आयुध है, तीन सिर हैं, और नौ नेत्र हैं, वह समस्त रोगों का अधिपति ज्वर प्रसन्न हो कर मुझे सुख प्रदान करें । जगत के आदि अंत जिनके हाथों में हैं, जो ज्ञानी, पुरणपुरुष, सूक्ष्म स्वरूप, परम महान और सबके अनुशासक हैं, वे अनिरुद्ध, प्रदुम्न, संकर्षण और भगवान वासुदेव सम्पूर्ण ज्वरों का नाश करें ( इस प्रकार प्रार्थना करने वालों का ज्वर दूर हो जाय )”*
यात्रा की कुशलता व दु:स्वप्न-नाश का वैदिक उपाय
जातवेद्से सुनवाम सोममरातीयतो नि दहाति वेद : ।
स न: पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्नि: ।।
‘जिस उत्पन्न हुए चराचर जगत को जाननेवाले और उत्पन्न हुए सर्व पदार्थों में विद्यमान जगदीश्वर के लिए हम लोग समस्त ऐश्वर्ययुक्त सांसारिक पदार्थो का निचोड़ करते हैं अर्थात यथायोग्य सबको बरतते हैं और जो अधर्मियों के समान बर्ताव रखनेवाले दुष्ट जन के धन को निरंतर नष्ट करता है वह अनुभवस्वरूप जगदीश्वर जैसे मल्लाह नौका से नदी या समुद्र के पार पहुँचाता हैं, वैसे हम लोगों को अत्यंत दुर्गति और अतीव दुःख देनेवाले समस्त पापाचरणों के पार करता है । वाही इस जगत में खोजने के योग्य है ।’ (ऋग्वेद : मंडल १, सूक्त ९९, मंत्र १ )
यात्री उपरोक्त मंगलमयी ऋचा का मार्ग में जप करें तो वह समस्त भयों से छुट जाता है और कुशलपूर्वक घर लौट आता है । प्रभातकाल में इसका जप करने से दु:स्वप्न का नाश होता है ।
(वैदिक मंत्रों का उच्चारण करने में कठिनाई होती हो तो लौकिक भाषा में केवल इनके अर्थ का चिंतन या उच्चारण करके लाभ उठा सकते है । )

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