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आज का हिन्दू पंचांग 31 अगस्त: इस नक्षत्र में आज है गणेश चतुर्थी का त्योहार, देखें मुहूर्त

आज का हिन्दू पंचांग 31 अगस्त: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 31 अगस्त 2022

दिन – बुधवार

विक्रम संवत् – 2079

शक संवत् – 1944

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – शरद

मास – भाद्रपद

पक्ष – शुक्ल

तिथि – चतुर्थी अपरान्ह 03:22 तक तत्पश्चात पंचमी

नक्षत्र – चित्रा रात्रि 12:12 तक तत्पश्चात स्वाती

योग – शुक्ल रात्रि 10:48 तक तत्पश्चात ब्रह्म

राहु काल – दोपहर 12:40 से 02:14 तक

सूर्योदय – 06:21

सूर्यास्त – 06:58

दिशा शूल – उत्तर दिशा में

ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:50 से 05:36 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:17 से 01:03 तक

व्रत पर्व विवरण – गणेश चतुर्थी

विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है । पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है ।
(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

गणेश चतुर्थी – 31 अगस्त 2022

गणेश चतुर्थी का व्रत एवं पूजन 31 अगस्त 2022 को है । ‘इस दिन स्नान, दान, जप और उपवास करने से 100 गुना फल होता है ।’ (भविष्यपुराण)
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (कलंकी चौथ) को चन्द्रदर्शन करने से मिथ्या दोष लगता है । इस वर्ष दिनांक 30 और 31 अगस्त – दो दिन चन्द्रदर्शन न करें ।

भारत के विभिन्न शहरों में चन्द्रास्त का समय –

मुम्बई –
30 अगस्त – रात्रि 9-01 पर
31 अगस्त – रात्रि 9-37 पर
अहमदाबाद
30 अगस्त – रात्रि 9-00 पर
31 अगस्त – रात्रि 9-34 पर
जोधपुर –
30 अगस्त – रात्रि 8-58 पर
31 अगस्त – रात्रि 9-30 पर
जम्मू –
30 अगस्त – रात्रि 8-48 पर
31 अगस्त – रात्रि 9-16 पर
बेंगलुरु –
30 अगस्त – रात्रि 8-43 पर
31 अगस्त – रात्रि 9-22 पर
भोपाल –
30 अगस्त – रात्रि 8-41 पर
31 अगस्त – रात्रि 9-15 पर
नयी दिल्ली –
30 अगस्त – रात्रि 8-40 पर
31 अगस्त – रात्रि 9-11 पर
हैदराबाद –
30 अगस्त – रात्रि 8-38 पर
31 अगस्त – रात्रि 9-15 पर
हरिद्वार –
30 अगस्त – रात्रि 8-35 पर
31 अगस्त – रात्रि 9-06 पर
लखनऊ –
30 अगस्त – रात्रि 8-25 पर
31 अगस्त – रात्रि 8-57 पर
पटना –
30 अगस्त – रात्रि 8-08 पर
31 अगस्त – रात्रि 8-41 पर
भुवनेश्वर –
30 अगस्त – रात्रि 8-07 पर
31 अगस्त – रात्रि 8-43 पर
कलकत्ता –
30 अगस्त – रात्रि 7-56 पर
31 अगस्त – रात्रि 8-30 पर
गुवाहटी –
30 अगस्त – रात्रि 7-41 पर
31 अगस्त – रात्रि 8-14 पर

भूलवश चन्द्रदर्शन हो जाये तो उसका प्रभाव कम करने के लिये –
इस मंत्र का 21, 51 या 108 बार जप करके पवित्र किया हुआ जल पीयें –
सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः ।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ।।
अर्थ – ‘सुंदर सलोने कुमार ! इस मणि के लिये सिंह ने प्रसेन को मारा है और जाम्बवान् ने उस सिंह का संहार किया है; अतः तुम रोओ मत । अब इस स्यमन्तक मणि पर तुम्हारा ही अधिकार है ।’
(ब्रह्मवैवर्तपुराण)

‘श्रीमद् भागवत’ के 10वें स्कंध के 56-57वें अध्याय में दी गयी ‘स्यमंतक मणि की चोरी’ की कथा का आदरपूर्वक पठन-श्रवण करना चाहिए ।

भाद्रपद शुक्ल तृतीया या पंचमी के चन्द्रमा का दर्शन करना चाहिए ।

गणेश चतुर्थी के दिन ‘ॐ गं गणपतये नमः ।’ का जप करने और गुड़मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दूर्वा व सिंदूर की आहुति देने से विघ्नों का निवारण होता है तथा मेधाशक्ति बढ़ती है ।

शिवा चतुर्थी – 31 अगस्त 2022

भविष्य पुराण के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का नाम ‘शिवा’ है । इस दिन किये गये स्नान, दान, उपवास, जप आदि सत्कर्म सौ गुना हो जाते हैं ।

इस दिन जो स्त्री अपने सास-ससुर को गुड़ के तथा नमकीन पुए खिलाती है वह सौभाग्यवती होती है । पति की कामना करनेवाली कन्या को विशेषरूप से यह व्रत करना चाहिए ।
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