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आज का हिन्दू पंचांग 14 जुलाई: गुरुवार : श्रावण महीना आरंभ, अशून्य शयन व्रत, जानें

आज का हिन्दू पंचांग 14 जुलाई: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 14 जुलाई 2022

दिन – गुरुवार

विक्रम संवत – 2079

शक संवत – 1944

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – वर्षा

मास – श्रावण (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार आषाढ़)

पक्ष – कृष्ण

तिथि – प्रतिपदा रात्रि 08:16 तक तत्पश्चात द्वितीया

नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा रात्रि 08:18 तक तत्पश्चात श्रवण

योग – वैधृति सुबह 08:28 तक तत्पश्चात विष्कम्भ

राहु काल – दोपहर 02:26 से 04:07 तक

सूर्योदय – 06:03

सूर्यास्त – 07:28

दिशा शूल – दक्षिण दिशा में

ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04:38 से 05:20 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:25 से 01:07 तक

व्रत पर्व विवरण

विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है ।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

श्रावण मास में वरदानस्वरूप बेलपत्र

(श्रावण मास : 14 जुलाई से 12 अगस्त )

श्रावण मास भगवान शिवजी की पूजा-उपासना के लिए महत्त्वपूर्ण मास है । इन दिनों में शिवजी को बेल के पत्ते चढ़ाने का विधान हमारे शास्त्रों में है । इसके पीछे ऋषियों की बहुत बड़ी दूरदर्शिता है ।

इस ऋतु में शरीर में वायु का प्रकोप तथा वातावरण में जल-वायु का प्रदूषण बढ़ जाता है । आकाश बादलों से ढका रहने से जीवनीशक्ति भी मंद पड़ जाती है । इन सबके फलस्वरूप संक्रामक रोग तेज गति से फैलते हैं ।

इन दिनों में शिवजी की पूजा के उद्देश्य से घर में बेल के पत्ते लाने से उसके वायु शुद्धिकारक, पवित्रतावर्धक गुणों का तथा सेवन से वात व अजीर्ण नाशक गुणों का भी लाभ जाने-अनजाने में मिल जाता है ।
उनके सेवन से शरीर में आहार अधिकाधिक रूप में आत्मसात् होने लगता है । मन एकाग्र रहता है, ध्यान केन्द्रित करने में भी सहायता मिलती है ।

परीक्षणों से पता चला है कि बेल के पत्तों का सेवन करने से शारीरिक वृद्धि होती है । बेल के पत्तों को उबालकर बनाया गया काढ़ा पिलाने से हृदय मजबूत बनता है ।

औषधि-प्रयोग
1. बेल की पत्तियों के 10-12 ग्राम रस में 1 ग्राम काली मिर्च व 1 ग्राम सेंधा नमक का चूर्ण मिलाकर रोज सुबह-दोपहर-शाम सेवन करने से अजीर्ण में लाभ होता है ।

2. बेलपत्र, धनिया व सौंफ को समान मात्रा में लेकर कूट लें । 10 से 20 ग्राम यह चूर्ण शाम को 100 ग्राम पानी में भिगो दें और सुबह पानी को छानकर पी जायें । इसी प्रकार सुबह भिगोकर शाम को पीयें । इससे स्वप्नदोष कुछ ही दिनों में ठीक हो जायेगा । यह प्रमेह एवं स्त्रियों के प्रदर में भी लाभदायक है ।
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