धर्म

आज का हिन्दू पंचांग 17 जून: आज है विनायक संकष्टी चतुर्थी, जानिए पूजा का शुभ महूर्त और राहुकाल

आज का हिन्दू पंचांग 17 जून: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक 17 जून 2022

दिन – शुक्रवार

विक्रम संवत – 2079

शक संवत – 1944

अयन – उत्तरायण

ऋतु – ग्रीष्म

मास – आषाढ़

पक्ष – कृष्ण

तिथि – तृतीया सुबह 06:10 तक तत्पश्चात चतुर्थी रात्रि 02:59 तक

नक्षत्र – उत्तराषाढा दोपहर 09:56 तक तत्पश्चात श्रवण

योग – इन्द्र शाम 05:18 तक तत्पश्चात वैधृति

राहु काल – दोपहर 02:22 से 04:04 तक

सूर्योदय – 05:54

सूर्यास्त – 07:27

दिशा शूल – दक्षिण दिशा में

ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04:31 से 05:12 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:20 से 01:02 तक

व्रत पर्व विवरण – संकट चतुर्थी विद्यालाभ योग

विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

विद्यालाभ योग -17 जून 2022
( गुजरात व महाराष्ट्र को छोड़कर भारत भर में )

विद्यालाभ हेतु मंत्र : ‘ॐ एें ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति मम जिह्वाग्रे वद वद ॐ एें ह्रीं श्रीं क्लीं नमः स्वाहा ।’

17 जून 2022 को प्रातः 3 से सुबह 9ः56 बजे तक 108 बार जप लें और फिर मंत्रजप के बाद उसी दिन रात्रि 11 से 12 बजे के बीच जीभ पर लाल चंदन से ‘ह्रीं’ मंत्र लिख दें ।

पढ़ने में रूचि न हो या सफलता न मिलती हो तो ….

जिन बच्चों का पढ़ाई की और रुझान नहीं होता अथवा कम होता है या काफी परिश्रम करके भी जिन्हें अध्ययन में पर्याप्त सफलता नहीं मिलती उनके लिए लाभदायी प्रयोग :
१ ग्राम कपूर और मौलसिरी का एक बीज पीसकर देशी गाय के २०० ग्राम घी में मिला दें । नित्य किसी भी समय ५ से १० मिनट तक संबंधित बच्चे के शयनकक्ष में इस मिश्रण से दीपक जलायें । अथवा उसके तकिये में मौलसिरी के ३ बीज रख दें ।

डर को जड़-मूल से उखाड़ने हेतु

जिस बच्चे को बार-बार नजर लगती हो या वह रात्रि में डरता हो तो उससे पलाश के वृक्ष का स्पर्श कराते हुए उसकी ७ परिक्रमा करवायें तथा रात को उसके सिरहाने पलाश के ३ बीजों को रखें तो शीघ्र ही वह समस्या दूर होती है । यदि सफेद पलाश हो तो और भी तीव्र तथा अत्यंत ही सटीक परिणाम प्राप्त होते हैं । साथ ही पूज्य बापूजी द्वारा कराये गये ‘ॐकार’ कीर्तन का ट्रैक चलाकर कीर्तन करायें, ‘ॐकार’ का जप करायें एवं ‘निर्भय नाद’ पुस्तक प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी पढ़ने हेतु बताये । निर्भय नाद पुस्तक पढ़ने से आंतरिक निर्भयता का सामर्थ्य जगता है । इससे डर जड़–मूल से उखड़कर भाग जायेगा ।

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