धर्म

आज का हिन्दू पंचांग 3 जून: विनायक चतुर्थी, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

आज का हिन्दू पंचांग 3 जून: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक 03 जून 2022

दिन – शुक्रवार

विक्रम संवत – 2079

शक संवत – 1944

अयन – उत्तरायण

ऋतु – ग्रीष्म

मास – ज्येष्ठ

पक्ष – शुक्ल

तिथि – चतुर्थी रात्रि 02:41 तक तत्पश्चात पंचमी

नक्षत्र – पुनर्वसु शाम 07:05 तक तत्पश्चात पुष्

योग – वृद्धि रात्रि 03:34 तक तत्पश्चात ध्रुव

राहुकाल – सुबह 10:57 से दोपहर 12:38 तक

सूर्योदय – 05:54

सूर्यास्त – 07:22

दिशाशूल – पश्चिम दिशा में

ब्रह्म मुहूर्त– प्रातः 04:29 से 05:12 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12.17 से 12:59 तक

व्रत पर्व विवरण– विनायक चतुर्थी, गुरु अर्जुनदेवजी शहीदी दिवस

विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

कलह-क्लेश, रोग व दुर्बलता मिटाने का उपाय

जिसको घर में कलह-क्लेश मिटाना हो, रोग या शारीरिक दुर्बलता मिटाना हो वह इस चौपाई की पुनरावृत्ति किया करे :

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ।।

ऋषिप्रसाद – दिसम्बर २०२० से

घरेलु सात्त्विक शिशु आहार (Baby Food)

आजकल बालकों को दूध के आलावा बाजारू बेबीफूड (फँरेक्स आदि) खिलाने की रीति चल पड़ी है। बेबीफूड बनाने की प्रक्रिया में अधिकांश पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं, कई बार कृत्रिम रूप से वापस मिलाये जाते हैं, जिसे बालकों की आंतें अवशोषित नही कर पाती। बेबीफूड का मुख्य घटक अतिशय महीन पिसा हुआ गेहूँ का आटा है, जो चिकना होने के कारण आंतों में चिपक जाता है। आटा पीसने के बाद एक हप्ते में ही गुणहीन हो जाता है जबकि बेबीफूड तैयार होने के बाद हाथ में आने तक तो कई हफ्ते गुजर जाते हैं। ऐसे हानिकारक बेबीफूड की अपेक्षा शिशुओं के लिए ताजा, पौष्टिक व सात्त्विक खुराक परम्परागत रीति से हम घर में ही बना सकते हैं।

विधि : १ कटोरी चावल (पुराने हो तो अच्छा), २ – २ चम्मच मूँग की दाल व गेंहूँ – इन सबको साफ करके धोकर छाँव में अच्छी तरह से सुखा लें। धीमी आँच पर अच्छे – से सेंक लें। मिक्सर में महीन पीस के छान लें। ३ – ४ माह के बालक के लिए शुरुआत में आधा कप पानी में आधा छोटा चम्मच मिलाकर पका लें। थोडा–सा सेंधा नमक डालकर पाचनशक्ति अनुसार दिन में एक या दो बार दे सकते हैं। धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाते जायें। बालक बड़ा होने पर इसमें उबली हुई हरी सब्जियाँ, पिसा जीरा, धनिया भी मिला सकते हैं। हर ७ दिन बाद ताजा खुराक बना लें।

यह स्वादिष्ट व पचने में अतिशय हल्का होता है। साथ ही शारीरिक विकास के लिए आवश्यक प्रोटीन्स, खनिज व कार्बोहाइड्रेटस की उचित मात्रा में पूर्ति करता है।Insta loan services

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