धर्म

आज का हिन्दू पंचांग 21 मार्च: जान‍िए दिन सोमवार का पंचांग और शुभ मुहूर्त

आज का हिन्दू पंचांग 21 मार्च: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 21 मार्च 2022

दिन – सोमवार

विक्रम संवत – 2078

शक संवत – 1943

अयन – उत्तरायण

ऋतु – वसंत

मास – चैत्र

पक्ष – कृष्ण

तिथि – तृतीया सुबह 08:02 तक ततपश्चात चतुर्थी 22 मार्च सुबह 06:24 तक

नक्षत्र – स्वाती रात्रि 09:31 तक तपश्चात विशाखा

योग – व्याघात अपरान्ह 3:55 तक तत्पश्चात हर्षण

राहुकाल – सुबह 08:14 से 09:45 तक

सूर्योदय – 06:43

सूर्यास्त – 06:51

चन्द्रोदय – रात्रि 09:59

दिशाशूल – पूर्व

विजय मुहूर्त – अपरान्ह 2:48 से 3:37 तक

अमृत काल – दोपहर 1:08 से 02:40 तक

गोधूलि मुहूर्त – शाम 6:39 से 7:03 तक

सायह्न सन्ध्या – शाम 6:51 से रात्रि 8:02 तक

ब्रह्म मुहूर्त– सुबह 05:08 से 05:55 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12.23 से 01:10 तक

व्रत पर्व विवरण – संकट चतुर्थी

विशेष – तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

दिन का चौघड़िया

अमृत – सर्वोत्तम 06:43 से 08:14
काल – हानि 08:14 से 09:45
शुभ – उत्तम 09:45 से 11:16
रोग – अमंगल 11:16 से 12:47
उद्वेग – अशुभ 12:47 से 02:18
चर – सामान्य 02:18 से 03:49
लाभ – उन्नति 03:49 से 05:20
अमृत – सर्वोत्तम 05:20 से 06:51

रात्रि का चौघड़िया

चर – सामान्य 06:51 से 08:20
रोग – अमंगल 08:20 से 09:49
काल – हानि 09:49 से 11:18
लाभ – उन्नति 11:18 से 12:46
उद्वेग – अशुभ 12:46 से 02:15
शुभ – उत्तम 02:15 से 03:44
अमृत – सर्वोत्तम 03:44 से 05:13
चर – सामान्य 05:13 से 06:42

चतुर्थी तिथि विशेष

चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश जी हैं।
हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक मास में दो चतुर्थी होती हैं।
पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी कहते हैं।अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।

शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्षके। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥

“ अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्षतक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है ।कोई कष्ट हो तो हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |

छः मंत्र इस प्रकार हैं –

ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।
ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।
ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।
ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।
ॐ अविघ्नाय नम:
ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:

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