धर्म

आज का हिन्दू पंचांग 24 मार्च: गुरु व मंगल के बीज मंत्र के जप का है दिन

आज का हिन्दू पंचांग 24 मार्च: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 24 मार्च 2022

दिन – गुरुवार

विक्रम संवत – 2078

शक संवत – 1943

अयन – उत्तरायण

ऋतु – वसंत

मास – चैत्र

पक्ष – कृष्ण

तिथि – सप्तमी रात्रि 12:09 तक तपश्चात अष्टमी

नक्षत्र – ज्येष्ठा शाम 05:30 तक तपश्चात मूल

योग – सिद्धि सुबह 07:29 तक तत्पश्चात व्यतिपात 25 मार्च सुबह 4:37 तक

राहुकाल – अपरान्ह 2:18 से 03:49 तक

सूर्योदय – 06:40

सूर्यास्त – 06:52

चन्द्रोदय – रात्रि 01:14

दिशाशूल – दक्षिण

विजय मुहूर्त – अपरान्ह 2:48 से 3:37 तक

अमृत काल – सुबह 09:12 से 10:43 तक

गोधूलि मुहूर्त – शाम 6:40 से 7:04 तक

सायह्न सन्ध्या – शाम 6:52 से रात्रि 8:03 तक

ब्रह्म मुहूर्त– सुबह 05:06 से 05:54 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12.22 से 01:09 तक

व्रत पर्व विवरण – शीतला सप्तमी

विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है था शरीर का नाश होता है। सप्तमी को आँवले का फल त्याग देना

चाहिए।
(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

दिन का चौघड़िया

शुभ – उत्तम 06:40 से 08:12
रोग – अमंगल 08:12 से 09:43
उद्वेग – अशुभ 09:43 से 11:15
चर – सामान्य 11:15 से 12:46
लाभ – उन्नति 12:46 से 02:18
अमृत – सर्वोत्तम 02:18 से 03:49
काल – हानि 03:49 से 05:21
शुभ – उत्तम 05:21 से 06:52

रात्रि का चौघड़िया

अमृत – सर्वोत्तम 06:52 से 08:20
चर – सामान्य 08:20 से 09:49
रोग – अमंगल 09:49 से 11:17
काल – हानि 11:17 से 12:46
लाभ – उन्नति 12:46 से 02:14
उद्वेग – अशुभ 02:14 से 03:42
शुभ – उत्तम 03:42 से 05:11
अमृत – सर्वोत्तम 05:11 से 06:39

व्यतिपात योग

आरम्भ: मार्च 24 सुबह 07:29
अन्त: मार्च 25 सुबह 04:37

व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।

कथा स्रोत – बडोदा २००८ में १२ नवम्बर को सुबह के दीक्षा सत्र में (स्वामी सुरेशानन्द जी के सत्संग से)

गुरुभक्ति बढ़ाने के प्रयोग

गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें :

एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं।

ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।

फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति , गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें। थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें।

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